पार्ट - 07 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के दीनी पेशवा मौलवी रशीद अहमद साहेब गंगोही लिखते हैं .......

(10). जो शख़्स अल्लाह जल्लशानहू के सिवा इल्म ग़ैब किसी दूसरे को साबित करे।।।। वह बेशक काफिर है उसकी इमामत और उससे मेल जोल मोहब्बत व मोवद्दत सब हराम है ।
#(फ़तावाए रशीदिया, जिल्द 2, सफा :10)

(11) इल्मे ग़ैब ख़ास्सऐ हक़ जल्लेशानहू है।
#(फ़तावाए रशीदिया, जिल्द: 1, सफा: 20 )

पार्ट - 06 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं ........

(9). जो अल्लाह की शान है उसमें किसी मख़लूक को दख़ल नहीं सो इसमें अल्लाह के साथ किसी मख़लूक को न मिलाओ। गो कोई कितना ही बङा हो और कैसा ही मुक़र्रब। मसलन यूं न बोले की अल्लाह व रसूल चाहेंगे तो फ़लाना काम हो जाएगा। कि सारा कारोबार जहाँ का अल्लाह ही के चाहने से होता है रसूल के चाहने से कुछ नहीं होता या कोई शख़्स किसी से कहे कि फ़लाँ के दिल में क्या है। या फ़लाँ की शादी कब होगी। या फ़लाँ दरख़्त में कितने पत्ते हैं। या आसमान में कितने सितारे हैं। तो इसके जवाब में यह न कहे कि अल्लाह व रसूल ही जाने। क्योंकि ग़ैब की बात अल्लाह ही जानता है रसूल को क्या ख़बर।
#(तकवियतुल ईमान, सफा : 58)

पार्ट - 05 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं ...…...

(7). अल्लाह साहब ने पैग़म्बर सलअम को फरमाया कि लोगों से यूं कह देवें कि ग़ैब की बात सिवाए अल्लाह के कोई नहीं जानता न फ़रिश्ते न आदमी न जिन न कोई चीज़ यानी ग़ैब की बात जान लेना किसी के एख़्तियार में नहीं।
#(तकवियतुल ईमान, सफा : 22)

(8). सो उन्होंने (यानी रसूले खुदा ने) बयान कर दिया कि मुझको न कुछ कुदरत है न कुछ ग़ैब दानी मेरी कुदरत का हाल तो यह है कि अपनी जान तक के भी नफा व नुकसान का मालिक नहीं तो दूसरे का तो क्या कर सकूं। और ग़ैबदानी अगर मेरे काबू में होती तो पहले हर काम का अन्जाम मालूम कर लेता अगर भला मालूम होता तो उसमें हाथ डालता अगर बुरा मालूम होता तो काहे को उसमे कदम रखता ग़र्ज़ कि कुदरत और ग़ैब दानी मुझ में नहीं और कुछ खुदाई का दावा नहीं फ़क़त पैग़ैम्बरी का मुझ को दावा है ।
#(तकवियतुल ईमान, सफा:24)

पार्ट - 04 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं .....…

(6). कुछ इस बात में भी उनको बङाई नहीं है कि अल्लाह साहब ने ग़ैब दानी एख़्तियार में देदी हो जिसके दिल को अहवाल जब चाहे मालूम करले या जिस ग़ैब का अहवाल जब चाहे मालूम करले कि वह जीता है या मर गया या किस शहर में है या जिस आइन्दा बात को जब इरादा कर लें दरियाफ्त कर ले कि फलां के यहाँ औलाद होगी या न होगी या उस सौदागरी में उसको फाएदा होगा या न होगा या लङाई में फतह पावेगा या शिकस्त कि इन सब बातों में भी सब बन्दे बङे हो या छोटे यह सब बेखबर हैं और नादान हैं।
#(तकवियतुल ईमान, सफा : 25)

पार्ट - 03 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं .........

(5). जो कोई किसी का नाम उठते बैठते लिया करे और दूर व नज़दीक से पुकारे या उसकी सूरत का ख़्याल बाँधे और यूं समझे कि मैं उसका नाम लेता हूं ज़बान से या दिल से या उसकी सूरत का या उसकी कब्र का ख़्याल बाँधता हूं तो वहीं उसको ख़बर हो जाती है और उस से मेरी कोई बात छुपी नहीं रह सकती और जो मुझ पर अहवाल खुज़रते हैं जैसे बीमारी व तन्दरुस्ती व कुशाइश व तंगी मरना व जीना ग़म व खुशी सब की हर वक्त उसे ख़बर रहती है और जो बात मेरे मुंह से निकलती है वह सब सुन लेते हैं। जो ख़्याल व वहम मेरे दिल में गुज़रता है वह सब से वाकिफ़ है सो इन बातों से मुश्रिक हो जाता है। और इस किस्म की बातें सब शिर्क है,,, ख़्वाह यह अकीदा अम्बिया व औलिया से रखे,ख़्वाह पीर व शहीद से ख़्वाह इमाम व इमाम ज़ादे से ख़्वाह भूत व परी से ख़्वाह यूं समझो कि यह बात उनको अपनी ज़ात से है ख़्वाह अल्लाह के दिये से ग़र्ज इस अकीदे से हर तरह शिर्क साबित होगा।
#(तकवियतुल ईमान, सफा:10)

पार्ट - 02 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं ........

(3). जो कोई यह दावा करे कि मेरे पास ऐसा कुछ इल्म है कि जब मैं चाहूं इस से गैब की बात मालूम कर लूं और आइन्दा बातों को मालूम कर लेना मेरे काबू में है सो वह बङा झूठा है कि दावा खुदाई का करता है और जो कोई किसी नबी वली या जिन व फरिश्ता को इमाम या इमामज़ादे या पीर व शहीद नुजूमी रुम्माल या जफ्फ़ारको या फ़ाल देखने वाले को या ब्राहमण इश्टी को या भूत व परी को ऐसा जाने और उसके हक़ में यह अकीदा रखे सो वह मुश्रिक हो जाता है।
#(तकवियतुल ईमान, सफा : 29)

(4). और इस बात में (यानी ग़ैब की बात न जानने में) औलिया अम्बिया और जिन व शैतान और भूत व परी में कुछ फ़र्क़ नहीं।
#(तकवियतुल ईमान, सफा : 8)

पार्ट - 01 | 🔥💥 ज़लज़ला 💥🔥 | 🕌 तस्वीर का पहला रुख़ 🕋

देवबन्दी जमाअत के इमामे अव्वल मौलवी इस्माइल साहब लिखते हैं ~

(1). जो कोई यह बात कहे कि पैग़म्बरे खुदा या कोई इमाम या बुजुर्ग ग़ैब की बात जानते थे और शरीअत के अदब से मुंह से न कहते थे सो वह बङा झूठा है बल्कि गैब की बात अल्लाह के सिवा कोई जानता ही नहीं।
#(तक़वियतुल ईमान, सफा: 27)

(2). किसी अम्बिया व औलिया या इमाम व शहीद की जनाब में हरगिज यह अकीदा न रखे न उसकी तारीफ में ऐसी बात कहे।
#( तक़वियतुल ईमान सफा : 26 )

Zikr -e- Alahazrat | Part Wise Link

▫Post --01 | 🎇 ZIKR-E-AALA HAZRAT 🌅

💥IMAAM AHMAD RAZA KHAN (AALA HAZRAT) BARELVI,
 
JO 14WI SADI HIJRI KE MUJADDID
AUR
BOHOT BADE AASHIQE RASOOL GUZRE HAIN.

UNKI SHAAN AUR ZINDAGI KE KUCH LAMHAAT PESH HAI ~~~

✨SARKAR AALA HAZRAT KI PAIDAISH
10 SHAWWAL 1272 HIJRI
MUTABIK 14 JUN 1856 ESVI
SANICHER (SATURDAY) KE DIN
ZOHAR KE WAQT
MOHALLA JASOLI BARELI ME HUI.
◆SUBH HAAN ALLAH◆

💫AALAHAZRAT KA
PEDAISHI NAAM MOHAMMAD,
TARIKHI NAAM ALMUKHTAR,
AUR AAPKE DADA NE AAPKA NAAM  "AHMAD RAZA" RAKHA.

DAAL DI QALB ME 'AZMATE MUSTAFA,
SAYYADI AALA HAZRAT PE LAAKHO SALAAM

▫Post --02 | 🎇 ZIKR-E-AALA HAZRAT 🌅

SARKAR AALA HAZRAT  KO ALLAH PAAK NE DAULATE ILM
KE SAATH DAULATE DUNIYA BHI
KHOOB 'ATA KI THI.

AAPKE KHANDAN KE BUZURG
MUGHAL DAUR (TIME) ME
BADE AOHDO PAR FA'IZ THE. 

AALA HAZRAT SARKAR KE WALID
MAULANA NAKI ALI KHAN SAHAB
BAHOT BADE AALIM GUJRE HAIN.

AUR DADA RAZA ALI KHAN SAHAB
BHI BAHOT BADE AALIM
AUR BA-KARAMAT WALI GUJRE HAIN.

▫Post --03 | 🎇 ZIKR-E-AALA HAZRAT 🌅

SARKAR AALA HAZRAT NE 21 ULOOM APNE WALID-E-MOHTARAM SE HASIL KIYE.

SARKAR AALA HAZRAT NE
4 SAAL KI CHOTI SI UMR ME
QURAN-SHARIF NAAZRA KHATM KIYA.

AUR

6 SAAL KI UMAR SHARIF ME
EK BADE MAJME KE SAAMNE MILAAD SHARIF PADHI.

      ●SUBH HAAN ALLAH●
( RADI ALLAHU TAALA ANHU )

▫Post --04 | 🎇 ZIKR-E-AALA HAZRAT 🌅

6 SAAL KI UMR SHARIF ME SARKAR AALA HAZRAT NE
BAGDAAD SHARIF KI SIM'T MALOOM KI
FIR AAPNE AAKHIRI DUM TAK
BAGDAAD SHARIF KI JAANIB PA'NW NA FAILAYE.

    ◆ SUBH HAAN ALLAH ◆

( RADI ALLAHU TAALA ANHU )