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▫पार्ट--05 | कायनात का दूल्हा

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ये जलसे, जुलूस हम और आप हर बरस दूल्हा की अकीदतो मोहब्बत में मनाते हैं, चरागाँ करते हैं, खुशियां मनाते हैं, हालांकि इस पर शिर्क और बिदअत का फ़तवा लगाने वालों ने रोक लगाने की हर चंद कोशिशें कीं और कर रहे हैं।

तू घटाए से किसी के न घटा है न घटे।
जब बढाए तुझे अल्लाह तआला तेरा।।

ये सिलसिला ता कयामत इन्शा अल्लाह यूं ही जारी रहेगा।

रहेगा यूं ही उनका चर्चा रहेगा।
पड़े खाक हो जाएं जल जाने वाले।।

इन जल्से जुलूसों के एखतेताम पर एक और बहुत बड़ा जलसए आम होगा। इतना बड़ा इज़्लास, इतना बड़ा इजतेमाअ जो चश्मे फलक ने अब तक देखा ही नहीं न सुनने में आया न उसका तसव्वुर ही किया जा सकता है जिसमें अव्वलीनो आखेरीन अपने और पराये दोस्तो दुश्मन, काले-गोरे, हर मुल्को मिल्लत के लोग जमा होंगे, आखीर में जो इजलास में शरीक न होना चाहेंगे वो भी घसीट कर लाये जाएंगे और इस इजलास की गरज़ो गायत भी उसी दूल्हा की शानो शौकत का इज़हार है, क्या ही खूब फरमाया है हमारे जद्दे अमजद उस्तादे ज़मन ने -

फकत इतना सबब है इनइकादे बज़्मे महशहर का।
कि उनकी शाने महबूबी दिखाई जाने वाली है।।

आज जो उन्हें नहीं मान रहे हैं, वो भी मान लें जो अब तक नहीं पहचान रहे हैं, तो पहचान लें कि उस रोज का मानना काम नहीं आएगा।

आज ले उनकी पनाह, आज मदद मांग उनसे।
फिर न मानेंगे कयामत में अगर मान गया।।

ज्यादा तफ़सील में न जाते हुए मुख्तसरन अर्ज करूं कि जलसा खतम होते ही अपने बेगाने सब अपने-अपने घरों की राह लेते हैं, वहां भी यही होगा कि इस इजलासे अज़ीम के खतम होने पर दुल्हा से सच्ची मोहब्बत रखने वाले अपने दिलो जान से चाहने वाले, उनके नक्शे कदम पर चलने वाले, उनकी इत्तेबाअ व पैरवी करने वाले उनकी बारगाह में अकीदतो महब्बत के नज़राने पेश करने वाले उसके हर हुक्म की तामील करने वाले अपने उस घर में दाखिल हो जायेंगे, जो बहुत पहले से उनके लिये तैयार है, जो अबदी राहत व आराम का घर है और इतनी खूबसूरत व हसीन है कि दुनिया में उसकी मिसाल नहीं पेश की जा सकती है जिसका नाम जन्नत है। जहां की

▫पार्ट--04 | कायनात का दूल्हा

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दुनिया में रोज़ाना लोग दूल्हा बनते हैं, बारातें रोज़ाना आती और जाती है, लेकिन इधर बारात गयी और सारे इन्तेज़ामात खत्म, फर्श लपेट दिया जाता है, शामियाने खोल दिये जाते हैं, लाईट ऑफ़ कर दी जाती है लेकिन ये कैसी बारात है कि फर्श जो बिछा है वह आज तक बिछा है, आसमान का शामियाना जो तना है वह आज तक तना है इसी से पता चला कि वो आने वाला दुल्हा जो है, जो आया था वो आज भी है।

अगर दुल्हा चला गया होता, अगर दुल्हा मआजल्लाह मरकर मिट्टी में मिल गया होता, तो ज़मीन का फ़र्श लपेट दिया जाता और आसमान का शामियाना बंद कर दिया जाता और ये रोशनियां खत्म कर दी जाती लेकिन मालूम हुआ कि वो दूल्हा आज भी है, और ये बारात सजी हुई है चाँद-सूरज की कंदीलें जो जली हैं, वो जल ही रही है, बड़ी रौशनी के साथ छोटी रौशनी भी हुई, चुनांचे आसमान की दो बड़ी रौशनियों के साथ-साथ छोटे कुमकुमे भी आज तक रौशन हैं और हर आने वाली सुहानी सुब्ह में फूलों की महक के साथ बुलबुलों की चहक, कोयलों की कूक, मुर्गों की अज़ानें और हज़ारहा छोटे-बड़े परिन्दों की दिलकश और मुतरन्निम आवाजें दूल्हा की आमद-आमद की खुशी में सरशार होकर नग़माते तरब आज तक दुनिया के तूलो-अर्ज में सुनी जा रही है। जो परिन्दे अपने-अपने लबो लहजे में गाते हैं और सुनने वालों के लिये अपनी मीठी-मीठी और सुरीली आवाज़ों से फ़रहतो

▫पार्ट--03 | कायनात का दूल्हा

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जब कोई बड़ी बारात होती है तो उसमें हर तरह के लोग होते हैं, अमीर-गरीब बच्चे-बूढ़े, जवान मर्द व औरत और यह चूंकि सबसे बड़ी बारात थी इसलिये इस बारात के बाराती भी सबसे ज़्यादा हैं, शाहो गदा, बच्चे-बूढ़े, जवान मर्द व औरत कमज़ोर व नातवां, तन्दुरुस्त व तवाना, अपने-पराये, अगले-पिछले सब शामिले बारात हैं, कभी आपने देखा होगा ? की जब कोई दूल्हा बनता है तो चाहे वो कैसा ही गया-गुज़रा, काला-कलूटा हो, लेकिन उस दिन दूल्हा ही की बात चलती है, उसकी इज्जत होती है, जो वो कहे वही लोग करते हैं, बारातियों का एजाज़ होता है तो उसके सदके में खाना खिलाया जाता है तो उसके तुफैल में।

तो जब मामूली दूल्हे का ये एजाज़ होता है तो जो कायनात का दूल्हा बनकर आया हो, जो हुस्नो खूबसूरती में लाजवाब हो, जिसके रुखे ताबां की ताबानियों से कायनात जगमगा रही हो, चाँद सूरज, सितारे झिलमिला रहे हों। हुस्ने युसूफ जो सारे आलम में मशहूर है, आज भी किसी खूबसूरत आदमी को देखकर लोग कह उठते हैं के ये तो युसूफ सानी मालूम होता है, उस युसूफ का हुस्न भी इसी दूल्हे के हुस्न का एकश्म्मिा है, एक ज़र्रा है, जिसके हुस्न की ये कैफियत कि उसकी सिर्फ मुस्कुराहट से इतनी रौशनी फैली कि अंधेरी रात में हज़रत आयशा ने अपनी गुमी हुई सुई तलाश कर ली हो।

बमज़मूने हदीसे पाक शबे दैजूर में ये दुल्हा जिधर निकल जाता तो दरो दीवार रौशनी के मीनारे बन जाते, ये तो सिर्फ हुस्नो जमाल की बात है वो कौन सी खूबी और कौन सा कमाल है जो इस अनोखे और निराले दुल्हा में न हो। हुस्नो जमाल हो कि जूदो नवाल, फज़लो कमाल, गरज़ कि हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी बात जो वजहे फ़ज़ीलत हो सकती हो, वो सब इस दूल्हा की जाते सुतूदा सिफात में बदर्जए अतम मौजूद है और क्यूं न हो कि जिसने आपको दुल्हा बनाया उसका ये बड़ा फ़ज़्ल है, जो ज़मीनो आसमान के खजानों का मालिक है, जो कुछ

▫पार्ट--02 | कायनात का दूल्हा

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कायदे की बात है के जब कहीं दूल्हा आता है तो दूल्हे की आमद पर उसकी हस्बे हैसियत इन्तेज़ामात होते हैं, अगर दूल्हा मामूली होता है तो इन्तेज़ामात भी मामूली होते हैं। अगर दूल्हा औसत दर्जे का होता है, तो इन्तेज़ामात भी दरमियानी, अगर दूल्हा आला दर्जे का होता है, तो इन्तेज़ामात भी आला, लेकिन ये दूल्हा तो इस शान का मालिक है, कि बकौल आला हज़रत फ़ाज़िले बरेलवी

सबसे आला वो औला हमारा नबी, सबसे बाला वो वाला हमारा नबी।
सारे ऊँचों से ऊँचा समझीये जिसे, है उस ऊँचे से ऊँचा हमारा नबी।।

तो जब दूल्हा इतना अर्फओ आला बलंदो बाला तो उसकी शायाने शान ही इन्तेज़ामात भी हुये कि दूल्हा की आमद से सदियों बरस पहले ज़मीन का फर्श बिछाया गया, आसमान का शामियाना ताना गया, चाँद-सूरज के हण्डे जलाये गये, सितारों के कुमकुमे रौशन किये गये और उसकी आमद-आमद के ऐलानात बरसहा बरस पहले कर दिये गये और ऐलान करने वाले भी मामूली इन्सान न थे बल्कि कायनाते इन्सान में सबसे अशरफ़ो आला गिरोह अंबिया अलैहिस्सलातो वत्तसलीम को इस काम के लिये मुकर्रर किया गया कि इन्हीं में हज़रत आदम अबुल बशर भी हैं, आदमे सानी हज़रत नूह अलैहिस्सलम भी हैं, हज़रत इब्राहीमे खलीलुल्लाह अलैहिस्सलाम भी हैं, हज़रत इस्माईल ज़बीहुल्लाह अलैहिस्सलाम भी हैं, हज़रत याकूब व युसूफ, हज़रत यहया व जकरिया, हजरत सुलेमान, हज़रत दाऊद, हज़रत मूसा व ईसा भी हैं। बल्के अज़ अव्वल ताआखिर कमोबेश एक लाख चौबीस

▫पार्ट--01 | कायनात का दूल्हा

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तहकीक आया तुम्हारे पास अल्लाह की जानिब से एक नूर और रौशन किताब। #(कुरान-ए-पाक)

वो सिर्फ नूर ही नहीं बल्कि वो मुजम्मिल भी है, मुदस्सिर भी है, ताहा व यासीन भी है, वो रहमतुल्लिल आलमीन खातेमुन नबीय्यीन शफीउल मुज़नबीन भी है वगैरह- वगैरह और इन सबके साथ-साथ उरुसे ममलेकते इलाहिया भी हैं, कायनात का दूल्हा बनकर तशरीफ़ ला रहे हैं और ऐसा अनोखा और निराला दूल्हा कि चश्मे फलक ने इनके अलावा न देखा न देख सकेगा और सैय्यदना हज़रत आदम से लेकर हज़रते ईसा तक न कोई आया और न सुबहे कयामत तक कोई आ सकेगा।

आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फ़ाज़िले बरेलवी रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने खूब फ़रमाया:-

तेरे खुल्क को हक ने अज़ीम कहा, तेरी खल्क को हक ने जमील किया।
कोई तुझसा हुआ है न होगा शहा, तेरे खालिके हुस्नो अदा की कसम।।

वो खुदा ने है मर्तबा तुझको दिया न किसी को मिले, न किसी को मिला।
कि कलामे मजीद ने खाई शहा तेरे शहरो कलामो बक़ा की कसम।।

वो ऐसा दूल्हा है कि अगर वो दूल्हा बनकर न आता तो कोई दूल्हा ही न बनता, दूल्हा बनना तो दरकिनार दुनिया