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▫सवानेह हयात | 💠 सय्यदना इमाम "हसन" रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 💠

नाम ----- सय्यदना इमाम "हसन" रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

वालिद --- मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

वालिदा -- ख़ातूने जन्नत हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

विलादत - 15 रमज़ान, 3 हिजरी

विसाल --- 5 रबियुल अव्वल, 49 हिजरी

उम्र    -- 45 साल 6 महीने कुछ दिन


आपके फ़ज़ाइल बेशुमार हैं, हुसूले बरकत के लिए चंद यहां ज़िक्र करता हूं ~

▫️जब हुज़ूर का विसाल हुआ तो आपकी उम्र मुबारक 7 साल 6 महीना थी फिर भी आपसे 13 हदीसें मरवी है,इस उम्र में हदीसों को याद रखना और उसे नक़ल करके रखना ये आपके हाफ़िज़े का कमाल है ।

▪️ आप नबी के सर से लेकर सीने तक मुशाबह थे और सीने से पैर तक हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

▫️ हुज़ूर ने आपको सहाबा के मजमे में सय्यद यानि सरदार फ़रमाया

▪️ कभी हुज़ूर नमाज़ के सज्दे में होते तो आप सरकार की गर्दन और पुश्त पर सवार हो जाते और हुज़ूर अपना सज्दा लम्बा फरमा देते मगर आपको पुश्त से ना हटाते जब तक कि आप खुद ना उतर जाते,सुब्हान अल्लाह

▫️ एक मर्तबा हुज़ूर आपको अपनी गर्दन पर बिठाये कहीं जा रहे थी कि किसी ने कहा वह साहबज़ादे सवारी कितनी अच्छी है इस पर हुज़ूर फरमाते हैं कि बेशक सवार भी बहुत अच्छा है

▪️ आप बेहद सखी थे तीन बार अपना आधा माल राहे खुद में खर्च किया और दो मर्तबा पूरा माल लुटा दिया

                      करामत     

एक बार आप पैदल हज को जा रहे थी आपके पैरों में वरम आ गया,आपके ग़ुलाम ने आपको सवारी पेश की मगर आप उस पर बैठे नहीं और उससे फरमाया जब तुम मंज़िल पर पहुंचोगे तो एक हब्शी मिलेगा तुम उससे

▫सवानेह हयात | 💠 उम्मुल मोमेनीन हज़रत सय्यदना 'खुदैजा' रज़ियल्लाहु तआला अन्हा 💠

आलाहज़रत मुजद्दिदे दीनो मिल्लत इमाम इश्को मुहब्बत सय्यदना इमाम अहमद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु तमाम उम्महातुल मोमेनीन व हज़रत सय्यदना 'खुदैजा' रज़ियल्लाहु तआला अन्हा की शाने अक़्दस में फरमाते हैं ~
अहले इस्लाम की मादराने शफीक़
बानवाने तहारत पे लाखों सलाम

जलवा गय्याने बैतुश शरफ पर दुरूद
पर्द गय्याने इफ्फत पे लाखों सलाम

सय्येमा पहली मां कहफे अमनो अमां
हक़ गुज़ारे रिफाक़त पे लाखों सलाम

अर्श से जिसपे तसलीम नाज़िल हुई
उस सराए सलामत पे लाखों सलाम

मंज़िलुन मिन कसब ला नसब ला सख़ब
ऐसे कोशक की ज़ीनत पे लाखों सलाम


नाम ----- उम्मुल मोमेनीन हज़रत सय्यदना 'खुदैजा' रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

वालिद --- खवीलद बिन असद

वालिदा -- फातिमा बिन्त ज़ायदह

विलादत - नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादत से 15 साल क़ब्ल

शौहर  --- नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम

निकाह --- ऐलाने नुबुव्वत से 15 साल क़ब्ल

औलाद --- (6) हज़रत क़ासिम, हज़रत अब्दुल्लाह, हज़रत ज़ैनब, हज़रत रुक़य्या, हज़रत उम्मे कुलसुम, हज़रत फातिमा

विसाल --- 10 रमज़ान, हिजरत से 3 साल क़ब्ल


◻️ इस पर कोई इख्तेलाफ नहीं कि नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पर सबसे पहले आप ही ईमान लाईं ।

◼️ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के निकाह में आने से पहले आपकी 2 शादियां हो चुकी थी जिनसे आपको 3 औलादें भी थी, लड़कों में हज़रत हिन्द रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सहाबी हुए और जंगे जमल में शहीद हुए ।

◻️ जिस वक़्त आपका निकाह नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से हुआ उस वक़्त आपकी उम्र 40 साल और नबी की उम्र 25 साल थी और हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अब तक कुंवारे थे ।

◼️ आप हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की रिफाकत में 25 साल रहीं और जब तक आप हयात में रहीं तब तक हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने दूसरा निकाह नहीं किया ।

◻️ रब ने बज़रिये हज़रत जिब्रईल के आपको सलाम कहलवाया ये खुसूसियत औरतों में सिर्फ आपको मिली और मर्दों में सिर्फ हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को ।

◼️ आप बहुत मालदार थीं पर अल्लाह और रसूल की खुशनूदी के लिए अपना सारा माल दीने राह में खर्च कर दिया ।

◻️ सिवाए हज़रत इब्राहीम के हुज़ूर की सारी औलादें आप ही से थी लड़के तो सब बचपन में ही इंतेक़ाल कर गए मगर लड़कियों में सबकी शादिेयां हुई, सय्यदह ज़ैनब का निकाह हज़रत अबुल आस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से हज़रत सय्यदह रुक़य्या व हज़रत सय्यदह उम्मे कुलसुम एक के बाद एक हज़रत उस्मान ग़नी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से व हज़रत सय्यदना फातिमातुत ज़ुहरा का निकाह मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से हुआ ।

◼️ आपकी क़ब्र मुबारक हिजून में है जिसको अब जन्नतुल मुअल्ला कहा जाता है आपकी नमाज़े जनाज़ा नहीं

▫सवानेह हयात | 💠 खातूने जन्नत हज़रत फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा 💠

आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत मुजद्दिदे दीनो मिल्लत इमाम इश्को मुहब्बत सय्यदना इमाम अहमद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु जिनकी शाने अक़्दस में फरमाते हैं ~
उस बुतूले जिगर पार-ए-मुस्तफा
मजला आरा-ए-इफ्फत पे लाखों सलाम

जिसका आंचल ना देखा मा ओ महर ने
उस रिदाए नज़ाहत पे लाखों सलाम

सय्यदा ज़ाहिरा तय्यबा ताहिरा
जाने अहमद की राहत पे लाखों सलाम

नाम ----- हज़रत फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

लक़ब ---- ज़ुहरा व बुतूल

वालिद --- रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम

वालिदा -- हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

विलादत - ऐलाने नुबुव्वत से 1 साल क़ब्ल

शौहर   --- मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

निकाह --- 17 रजब, पीर, 2 हिजरी

औलाद --- (6) हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन, हज़रत मोहसिन, हज़रत ज़ैनब, हज़रत कुलसुम, हज़रत रुक़य्या रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन

विसाल --- 3 रमज़ान, मंगल,11 हिजरी

आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के फज़ाइलो मनाक़िब बेशुमार हैं तहरीर में नहीं आ सकते मगर हुसूले बरकत के लिए चन्द का ज़िक्र करता हूँ ~

◼️ आप नबीये पाक की सबसे छोटी साहबज़ादी हैं, नबीये पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को आपसे बेहद्द मुहब्बत थी, आपके आने पर नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फौरन खड़े हो जाते आपकी पेशानी चूमकर अपनी मसनद पर बिठाते ।

◻️ उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आईशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि मैंने उठने बैठने चाल ढाल और बर्ताव में फातिमा से बढ़कर हुज़ूर के मुशाबह किसी को नहीं देखा ।

◼️ मशहूर है कि आप की रूह क़ब्ज़ करने के लिए हज़रत इस्राईल अलैहिस्सलाम नहीं आये बल्कि खुद रब्बे ज़ुलजलाल के हुक्म से आपकी रूह क़ब्ज़ हुई ।

◻️ आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा कभी नमाज़ के क़याम में ही होतीं और रात गुज़र जाती कभी रुकू में और कभी एक ही सजदे में सारी रात निकल जाती आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं ऐ मौला तूने कैसे छोटी छोटी रातें बनायीं है कि फातिमा दिल खोलकर इबादत भी नहीं कर पाती ।

◼️ आप एक ही वक़्त में हाथों से आता गूंधतीं, ज़बान से क़ुरआन पढ़तीं, दिल में उसकी तफसीर करतीं, पैरों से हसनैन का झूला झूलातीं और आंखों से खुदा की याद में रोतीं ।

📕 मदारेजुन नुबुव्वत, जिल्द 2, सफह 127-787-788
📕 सच्ची हिक़ायत, सफह 325
📕 ज़रक़ानी, जिल्द 3, सफह 200
📕 शरह सलामे रज़ा, सफह 459


◻️ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि फातिमा मेरे गोश्त का एक टुकड़ा है तो जिसने उसे नाराज़ किया उसने मुझे नाराज़ किया और जिसने उसे तकलीफ दी उसने मुझे तकलीफ दी (इसी लिए आपके निकाह में रहते हुए हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मौला अली पर दूसरा निकाह हराम फरमा दिया था) ।

📕 मिश्कात, सफह 568


◼️ जिस तरह हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु जन्नती जवानों के सरदार हैं उसी तरह हज़रते फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा तमाम जन्नती खवातीनों की सरदार हैं ।

📕 बुखारी, जिल्द 1, सफह 532


◻️ एक मर्तबा मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से पूछा कि आप किसको ज़्यादा महबूब रखते हैं मुझे या फातिमा को तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि

▫सवानेह हयात | 💠 सय्यदना आइशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा 💠

आलाहज़रत मुजद्दिदे दीनो मिल्लत इमाम इश्को मुहब्बत सय्यदना इमाम अहमद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु, हज़रत सय्यदना 'आइशा' सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा की शाने अक़्दस में फरमाते हैं ~
बिन्ते सिददीक़ आरामे जाने नबी
उस हरीमे बराअत पे लाखों सलाम

यानि है सूरह नूर जिनकी गवाह
उनकी पुरनूर सूरत पे लाखों सलाम

जिन में रुहुल क़ुदुस बे इजाज़त न जायें
उस सुरादिक़ की अज़मत पे लाखों सलाम

शम्ये ताबाने काशानए इज्तिहाद
मुफ्तिये चार मिल्लत पे लाखों सलाम

नाम ----- उम्मुल मोमेनीन हज़रत सय्यदना 'आइशा' सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

वालिद* --- हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़

वालिदा -- हज़रत ज़ैनब बिन्त आमिर (उम्मे रूमान)

विलादत - ऐलाने नुबुव्वत से 4 साल बाद

निकाह --- ऐलाने नुबुव्वत से 10 साल बाद

विसाल --- 17 रमज़ान,57 हिजरी,इतवार

◼️ जिस वक़्त आपका निकाह नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से हुआ उस वक़्त आपकी उम्र 6 साल और हुज़ूर की उम्र 50 साल थी ।

◻️ आपकी रुखसती हिजरत के दूसरे साल यानि 9 साल की उम्र में हुई।

◼️ 8 साल 5 महीने आप हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की रफाक़त में रहीं हुज़ूर के विसाल के वक़्त आपकी उम्र 18 साल थी ।

◻️ आप हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की तन्हा ऐसी बीवी हैं जो निकाह के वक़्त कुंवारी थी ।

◼️ आपसे 2210 हदीसें मरवी हैं जिनमें से 174 मुत्तफिक़ अलैहि है यानि बुखारी व मुस्लिम दोनो में है ।

◻️ जब आप पर तोहमत लगायी गई तो आपकी पाक दामनी के लिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने सूरह नूर में 18 आयतें नाज़िल फरमाई ।

◼️ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मुझे दुनिया में सबसे ज़्यादा मुहब्बत आइशा से है

▫सवानेह हयात | 💠 हज़रत सय्यदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 💠

◼️ आप हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के चचा हैं, आप उम्र में हुज़ूर से 2 या 4 साल ही बड़े थे चुंकि हज़रते सोबिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का आपने भी दूध पिया है और हुज़ूर ने भी सो इस तरह आप हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के रज़ाई भाई भी हैं ।
आप हुज़ूर से बेहद मुहब्बत करते थे यही वजह है कि जब अबु जहल ने हुज़ूर को बुरा कहा और आपको सख्त अज़ीयत दी तो आप जोशे गज़ब में कमान लिए हुए अबु जहल के पास पहुंचे और उसके सर पर कमान से ऐसा मारा कि उसका सर फट गया हालांकि आप अब तक ईमान नहीं लाये थे, उसी के बाद आपने अलल ऐलान कल्मा पढ़ा और मुसलमान हो गए और दरबारे नुबूवत से आपको असदुर्रसूल यानि रसूल का शेर का खिताब मिला ।

3 हिजरी में जंगे उहद में आपकी शहादत हुई और फरिश्तों ने आपको गुस्ल दिया, हज़रते अमीर मुआविया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दौर में जब नहरें खोदने का काम चल रहा था तो एक कुदाल आपके पैर में लगी और पैर फट गया तो ताज़ा खून जिस्म से बह निकला हालांकि आपको दफ्न हुए 46 साल गुज़र चुके थे ।

इसी तरह हज़रते फातिमा खाज़िया व शैख महमूद कर्दी जब आपकी क़ब्र की ज़ियारत को गए और सलाम पेश किया तो आपने बा आवाज़े बुलन्द उनको क़ब्र से ही जवाब दे दिया ।

📕 ज़रक़ानी, जिल्द 3, सफह 270
📕 हुज्जतुल्लाहि अलल आलमीन, जिल्द 2, सफह 863


💝 जो क़ादिर होने के बावजूद गुनाह ना करे वो जन्नती है 🌹

◻️ एक मर्तबा खलीफा हारून रशीद और उनकी बीवी ज़ुबैदा खातून में किसी बात पर तकरार हो गयी और ज़ुबैदा खातून ने जलाल में खलीफा को जहन्नमी कह दिया खलीफा ने कहा कि अगर मैं जहन्नमी हूं तो तुझे तलाक़ है, चुंकि हारुन रशीद को अपनी बीवी से बेहद मुहब्बत थी सो वो बेचैन हो गए और उसका जवाब ढूंढ़ने लगे मगर कोई भी इसका जवाब नहीं दे सका क्योंकि कौन जन्नती है और कौन जहन्नमी इसका इल्म तो सिर्फ रब को है।

दरबार लगा हुआ था कि अचानक एक छोटा लड़का खड़ा हुआ और बोला कि अगर आप कहें तो मैं इसका जवाब दे सकता हूं खलीफा ने हां कहा तो, लड़का बोला कि आपको मेरी ज़रूरत है या मुझे आपकी तो खलीफा ने कहा कि यकीनन मुझे तुम्हारी ज़रूरत है तो लड़का बोला फिर ये कैसे हो सकता है कि मैं नीचे खड़ा होकर जवाब दूं और आप तख्त पर बैठकर सवाल पूछें लिहाज़ा आप नीचे आयें और मैं तख्त पर बैठता हूं, सब उसकी इस जुर्रत पर हैरान व शशदर थे मगर खलीफा इल्म की क़द्र करना जानते थे सो फौरन तख्त से नीचे उतर आये और लड़का तख्त पर बैठ गया ।

लड़का बोला कि आपके सवाल का जवाब देने से पहले मुझे इसका जवाब दीजिये कि क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप गुनाह करने पर क़ुदरत रखते हों और सिर्फ खुदा के डर से गुनाह ना किया हो तो खलीफा बोले कि खुदा की कसम ऐसा हुआ है कि मैंने क़ुदरत रखने के बावजूद गुनाह नहीं किया है तो लड़का बोला कि मैं फतवा देता हूं कि आप जन्नती हैं और आपका तलाक़ नहीं हुआ।

दरबार के सारे उल्मा उससे दलील मांगने लगे तो लड़का बोला कि मौला तआला क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि गुनाह का कस्द किया और फिर गुनाह ना किया तो उसका ठिकाना जन्नत है सब उस लड़के की

▫सवानेह हयात | 💠 हज़रत उस्मान ग़नी 💠

◼️ आपका सिलसिलाये नस्ब इस तरह है -उस्मान बिन अफ्फान बिन अबुल आस बिन उमैय्या बिन अब्दे शम्श बिन अब्दे मुनाफ, अब्दे मुनाफ पर आपका नस्ब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से जा मिलता है, और आपकी वालिदा का नाम उर्वी बिन्त करीज़ बिन रबिया बिन हबीब बिन अब्दे शम्श है ये हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की फूफी ज़ाद बहन थी ।

◻️ आपकी विलादत आम्मुल फील यानि हाथी वाले वाक़िये के 6 साल बाद हुई ।

◼️ आप हज़रत अबु बक्र व हज़रत अली व हज़रत ज़ैद बिन हारिसा के बाद ईमान लाये और आप चौथे मुसलमान थे ।

◻️ आपका पहला निकाह हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बेटी हज़रते रुकय्या रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के साथ हिजरत से क़ब्ल हुआ।

आप हर जंग में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के साथ ही रहे मगर जंगे बद्र में शरीक ना हो सके क्योंकि उस वक़्त हज़रते रुकय्या की तबियत बहुत ज़्यादा अलील थी और हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उन्हें उनकी देखभाल करने के लिए रोक दिया था, पर इसी बीमारी में ही 3 हिजरी में आपका इंतेक़ाल हो गया जिस वक़्त क़ासिद बद्र के फतह की खुश खबरी लेकर आया उस वक़्त आप हज़रते रुकय्या को दफ़्न फरमा रहे थे, चुंकि माले गनीमत में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने बाक़ी गाज़ियों की तरह आपका भी हिस्सा लगाया इसलिए आपको भी ग़ज़्वये बद्र में शुमार किया जाता है,

उसके बाद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी दूसरी बेटी हज़रते उम्मे कुलसूम रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का निकाह आपसे कर दिया, हज़रते रुकय्या से एक औलाद हज़रत अब्दुल्लाह पैदा हुए मगर वो भी 6 साल की उम्र में ही इंतेकाल फरमा गए और हज़रते उम्मे कुलसुम से आपको कोई औलाद न हुई और शअबान 9 हिज्री में हज़रते उम्मे कुलसूम भी वफात पा गईं ।

◼️ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तक कोई ऐसा शख्स नहीं हुआ जिसके निकाह में किसी नबी की 2 बेटियां आयी हो सिवाये हज़रते उस्मान ग़नी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के इसीलिए आपका लक़ब ज़ुन्नुरैन हुआ, हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अगर मेरी 40 बेटियां होती और वो सब एक के बाद एक इंतेक़ाल करती जाती तो मैं एक के बाद

▫सवानेह हयात | 💠 सिद्दीक़े अकबर 💠

नाम           - अब्दुल्लाह 
लक़ब        - सिद्दीक़े अकबर  
वालिद       - अबु कहाफा
वालिदा     - सलमा बिन्त सखर 
विलादत   -हुज़ूर की विलादत से 26 महीने बाद
विसाल     -22/6/13 हिजरी

आपकी सीरत एक पोस्ट में बता पाना नामुमकिन है मगर हुसूले फैज़ के लिए चंद हर्फ आपकी शान में लिखता हूं, मौला तआला क़ुबूल फरमाये ।

◼️ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि नबियों के बाद तमाम इंसानों में सबसे अफज़ल अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हैं ।

◻️ आपका नस्ब युं है अब्दुल्लाह बिन अबु कहाफा बिन उस्मान बिन आमिर बिन उमर बिन कअब बिन सअद बिन तय्युम बिन मुर्राह बिन कअब, मुर्राह बिन कअब पर आपका नस्ब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से जाकर मिल जाता है।

◼️ आपके बारे में मशहूर है कि आपने ज़मानये जाहिलियत में भी कभी बुत परस्ती नहीं की और ना कभी शराब पी, जब आप 4 साल के थे तो आपके बाप आपको लेकर अपने बुतों के सामने गए और उनसे कहा कि ये हमारे माबूद हैं तुम इनकी पूजा करो तो 4 साल के सिद्दीक़े अकबर उन बुतों से फरमाते हैं कि मैं भूखा हूं मुझे खाना दो मैं कुछ कहना चाहता हूं मुझसे बात करो जब उधर से कुछ जवाब नहीं आया तो आपने एक पत्थर उठाकर उस बुत पर ऐसा मारा कि वो आपके जलाल का ताब ना ला सका और चकना चूर हो गया, जब आपके बाप ने ये देखा तो आपको तमांचा मारा और घर वापस ले आये, और अपनी बीवी से सारा वाक़िया कह सुनाया तो वो फरमाती हैं कि इसे इसके हाल पर छोड़ दीजिये जब ये पैदा हुआ था तो किसी आवाज़ देने वाले ने ये कहा कि मुबारक हो तुझे कि ये मुहम्मद  सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का रफीक़ है मुझे नहीं मालूम कि ये  मुहम्मद  सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम कौन हैं ।

◻️ मर्दो में सबसे पहले आप ईमान लाये और सबसे पहले हुज़ूर के साथ नमाज़ पढ़ने का शर्फ आपको मिला ।

◼️ आपने दो मर्तबा अपनी पूरी दौलत हुज़ूर के क़दमो पर डाल दी ।

◻️ आपका लक़ब सिद्दीक़ होने का बड़ा मशहूर वाक़िया है कि जब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मेराज शरीफ से वापस आये और ये वाक़िया लोगों में बयान किया तो अबु जहल भागता हुआ अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास पहुंचा और कहने लगा कि अगर कोई कहे कि मैं हालाते बेदारी में रात ही रात सातों आसमान की सैर कर आया जन्नत दोज़ख देख आया खुदा से भी मिल आया तो क्या तुम यक़ीन करोगे आपने फरमाया कि नहीं, तो कहने लगा कि जिसका तुम कल्मा पढ़ते हो वो *मुहम्मद* सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तो लोगों से यही कह रहे हैं तो आपने फरमाया कि क्या वाकई वो ऐसा कहते हैं तो अबु जहल बोला कि हां वो ऐसा ही कहते हैं तो आप फरमाते हैं कि जब वो ऐसा कहते हैं तो सच ही फरमाते हैं अब जब आपने उस वाक़िये की तस्दीक़ की तो वो मरदूद वहां से भाग निकला और उसी दिन से आपको सिद्दीक़ का खिताब मिला ।

◼️ आपने हुज़ूर की मौजूदगी में 17 नमाज़ों की इमामत फरमाई ।

◻️ आपके खलीफा बनने पर सबसे पहले हज़रते उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने आपकी बैयत की ।

◼️ जब आपने तमाम माल लुटा दिया तो फक़ीराना लिबास में बारगाहे नबवी में हाज़िर थे कि हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम हाज़िर हुए और कहा कि ऐ सिद्दीक़ आप मालदार होते हुए भी ऐसे कपड़ो में क्यों है तो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि उन्होंने अपना पूरा माल दीने इस्लाम पर खर्च कर दिया तो हज़रत जिब्रील फरमाते हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अबु बक्र को सलाम भेजा है और पूछा है कि क्या इस हालत में भी अबु बक्र मुझसे राज़ी हैं इतना सुनते ही हज़रते अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वज्द में आ गए और बा आवाज़े बुलंद यही फरमाते रहे कि मैं अपने रब से राज़ी हूं मैं अपने रब से राज़ी हूं, अल्लाह अल्लाह क्या शान है सिद्दीक़े अकबर की कि खुद मौला उनसे पूछ रहा है कि क्या तुम मुझसे राज़ी हो अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर।

◻️ आप वो मुक़द्दस सहाबी हुए जिनकी 4 पुश्तें सहाबियत से सरफराज़ हैं, आपके वालिदैन ईमान लाये और सहाबी हुए आप खुद सहाबी हुए आपकी औलाद में मुहम्मद व अब्दुल्लाह व अब्दुर्रहमान व सय्यदना आयशा व सय्यदना अस्मा सब के सब सहाबी हुए और आपके पोते मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान भी सहाबी हुए, ये फज़ीलत आपके सिवा किसी को हासिल नहीं, रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन ।

◼️ आपका और मौला अली का हालते जनाबत में भी मस्जिद में जाना जायज़ था ।

◻️ 2 साल 3 महीने 11 दिन आपकी खिलाफत रही ।

◼️ आपसे कई करामतें भी ज़ाहिर हैं, जब आपका विसाल होने लगा तो आपने अपनी प्यारी बेटी सय्यदना आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अंहा को बुलाया और फरमाया कि बेटी मेरा जो भी माल है उसे तुम्हारे दोनों भाई मुहम्मद व अब्दुर्रहमान और तुम्हारी दोनों बहनें हैं उनका हिस्सा क़ुर्आन के मुताबिक बाट देना, इस पर आप फरमाती हैं कि अब्बा जान मेरी तो एक ही बहन है बीबी अस्मा ये दूसरी बहन कौन है तो आप फरमाते हैं कि मेरी एक बीवी बिन्त खारेजा जो कि हामिला हैं उनके बतन में एक लड़की है वो तुम्हारी दूसरी बहन है, और आपके विसाल के बाद ऐसा ही हुआ उनका नाम उम्मे कुलसुम रखा गया, इसमें आपकी 2 करामत ज़ाहिर हुई पहली तो ये कि मैं इसी मर्ज़ में इन्तेक़ाल कर जाऊंगा और दूसरी ये भी कि पैदा होने से पहले ही बता देना कि लड़का है या लड़की ।

◻️ आपकी उम्र 63 साल हुई आपकी नमाज़े जनाज़ा हज़रते उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने पढ़ाई और खुद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की इजाज़त से आपको उन्ही के पहलु में दफ्न किया गया, ये आपकी शानो अज़मत है।

◼️ आपकी शान को समझने के लिए ये तन्हा हदीस ही काफी है हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अगर एक पलड़े में अबु बक्र का ईमान रखा जाए और दूसरे में तमाम जहान वालो का तो सिद्दीक़