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▫पोस्ट-- 11 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हज़रते उतबह बिन फरक़द रजि अल्लाहु अन्हु के बदन से बड़ी दिलकश और दिल आवेज़ खश्बू आती थी जिस मजलिस में तशरीफ ले जाते थे, तो लोग तअज्जुब से पुछते थे कि ऐ उतबह कौन सा इत्र इस्तेमाल करते हो जिस की ख़श्बू हमारे इत्र की खुश्बू को माँद कर देती है।

उतबह की तीन बीवियां थीं हर एक की ख्वाहिश यही रहती थी कि जो भी इत्र इस्तेमाल करे वह दूसरी दो सौकनों से ज्यादह खुश्बू दार हो। हर बीवी बेहतर से बेहतर खुश्बू लगाने में कोशां रहती थीं।

लेकिन हज़रते उतबह ने कभी खुश्बू के लिए किसी इत्र का इस्तेमाल नहीं किया था इस के बावजूद उनके बदन से फूटने वाली कस्तूरी की महक के मुकाबले उन की बीवियों की इत्र व खुश्बू की कोई हक़ीक़त न थी ।

एक मरतबा उन की एक जौजह उम्मे आसिम ने उन से पूछा कि क्या वजह है, आप खुश्बू भी नहीं लगाते लेकिन आपके जिस्म से जो खुश्बू निकलती है उसके सामने सारे इत्र और कस्तूरियाँ बेकार हैं, इस में राज़ क्या है आप हमें बताइये?

आप ने उम्मे आसिम से कहना शुरू किया कि बचपन में मेरे जिस्म में छोटे छोटे दाने निकल आए थे जिस से बदन में खुजलाहट पैदा हो गई थी।

मैं तबीबे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में हाजिर हुवा, हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे अपने सामने बैठने का हुक्म दिया फिर मेरे कपड़े उतरवा दिये और अपनी एक हथेली मुबारका पर लुआबे दहन रखकर दूसरी से मला उस के बाद अपने दस्ते अकदस को मेरी पीठ और मेरे पेट पर फेर दिया । यह उस

▫पोस्ट-- 10 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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सहाबी_ए_रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज़रते अब्दुल्लाह अनीस रज़िअल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि एक गजवा में मेरे सर पर तलवार का जख्म आया और मैं दर्द से तड़प उठा अपने आका व मौला सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में हाजिर हो कर अपना ज़ख्म दिखाया ।

हुजूर अनवर शफी_ए_महशर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना लुआबे दहन जख्म पर डाल दिया तो उस की बरकत से सारा जख्म जो कि जान लेवा था मुंदमिल हो गया यहाँ तक कि उस जख्म का निशान भी बाकी ना

▫पोस्ट-- 09 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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काजी अयाज़ लिखते हैं कि कुलसूम बिन हसीन रजि अल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि एक मौका पर मेरी गरदन पर
तलवार की जर्ब लगी मैं रहमते आलम नूरे मुजस्सम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमते बा बरकत में हाजिर हुवा ।

आप ने अपना लुआबे दहने मुबारक मेरी गरदन के उस गैहरे जख्म पर मल दिया जिस से उसी वक्त मेरा जख्म
दुरूस्त हो गया और मैं मुकम्मल सिहत याब हो गया।

▫पोस्ट-- 08 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हज़रते सय्यदुना अबू कतादह रजि अल्लाहु अन्हु जिन का अस्ल नाम हारिस बिन रुबइल अंसारी अस्लमी है, एक जंग के मौका पर उन्हें तीर लगा और ज़ख़्म काफी गहरा और खतरनाक था, रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाहे नाज़ में हाज़िर हुए और अर्ज करते हैं -

या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे दुश्मन के तीर ने जख्मी कर दिया है।

हुजूर अपना लुआबे दहन शरीफ उन के ज़ख़्मों पर लगा देते हैं जिस की बरकत से न दर्द रहा न ज़ख़्म में खून या

▫पोस्ट-- 07 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हज़रते जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजि अल्लाहु अन्हु की मेज़बानी का वाकेअह इमाम बुखारी व मुस्लिम व दीगर मुहद्दिसीन ने रिवायत किए हैं।

गजव ए खन्दक की तैयारी के मौका पर जब हजरते जाबिर रजि अल्लाहु अन्हु सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शिकमे मुबारक को कमर से चिमटा हुवा देख कर महसूस करते हैं कि आप फाका से हैं और भूक की वजह से आप की यह हालत हो गई ।

हज़रते जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजि अल्लाहु अन्हु अर्ज करते हैं कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अगर आप की इजाजत हो तो मैं घर तक हो आऊँ।

सरकार इजाज़त मरहमत फरमा देते हैं।

घर आकर बीवी से कहा, "मैं ने आका_ए_करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को सख्त फाका की हालत में देखा है क्या तेरे पास हुजूर की बारगाह में पेश करने के लिए कुछ है?

उस नेक बख्त खातून ने कहा इस वक्त थोड़ा सा जौ है और एक बकरी का बच्चा है इस के इलावह कोई चीज़ ऐसी नहीं है जिस से सरकार की मेहमान नवाजी का शर्फ हासिल किया जा सके।

हज़रते जाबिर रजि अल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि मैं ने उस बकरी के बच्चे को जिबह करके गोश्त पकने के लिए हाँडी में डालकर चूल्हे पर रख्खा और मेरी बीवी ने जौ पीस कर रोटी पकाने की तैयारी शुरू कर दी और मैं हुजूर की ख़िदमत में हाज़िर होने के लिए मैदाने जंग में जाने लगा।

मेरी बीवी ने मुझ से कहा कि हुजूर के सहाबा के रूबरू मुझे शरमिन्दह न करना मैं ने जब सरकार सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाज़िर हो कर चुपके से अर्ज की या रसूलल्लाह हमारे पास बकरी का एक छोटा सा बच्चा है और एक सा जौ का आटा, हुजूर खुद भी तशरीफ़ ले चलें और अपने हमराह दस सहाबा को और एक दूसरी रिवायत में है कि उन्हों ने अर्ज की हुजूर के लिए थोड़े से खाने का इन्तिजाम किया है लिहाजा दो एक सहाबा के साथ तशरीफ ले चलें ।।

हुजूर ने इरशाद फ़रमाया कि अपनी बीवी से कहो जब तक मैं न पहुंचू चूल्हे से हाँडी को न उतारना और तन्दूर से रोटी न निकालना, यह कह कर हज़रते जाबिर को घर रवाना किया फिर तमाम लशकर में एलान करवा दिया कि ऐहले खन्दक आज जाबिर बिन अब्दुल्लाह के यहाँ सब की दावत है।

चुनांचे सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म के साथ मुहाजेरीन व अंसार जाबिर के घर की तरफ रवाना हो गए हज़रते जाबिर ने अपनी जौजह से बताया कि हुजूर तो तमाम लशकरे इस्लाम अपने साथ लेकर तशरीफ ला रहे हैं। इस्लाम की उस नेक बख़्त खातून ने कहाः अल्लाहु व रसूलहू नहनू अख्बरनाहु बिमा इन्दनाः अल्लाह और उस के रसूल खूब जानते हैं कि हमारे पास क्या है हमारी हालत कैसी है फिर जब हुजूर तशरीफ़ लाए तो गूंधा हुवा आटा पेश कर दिया। सरकार ने उस में अपना थूक शरीफ़ डाला और बरकत की दुआ फ़रमाई। उस के बाद हज़रते जाबिर को हुक्म दिया कि रोटी पकाने वाली औरतों को बुला लाओ जो तुम्हारी बीवी के साथ मिलकर रोटी पकाएं फिर आप ने हज़रते जाबिर से बताया कि मेरे साथ एक हजार आदमी आये हैं गोश्त की हाँडी को चूल्हे से मत उतारना वहीं से बरतनों में सालन डालते जाना।

हजरते जाबिर कहते हैं कि मैंने ऐसा ही किया सहाब_ए_किराम बारी-बारी आते गए और पेट भर खाना खाकर

▫पोस्ट-- 06 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हजरते अब्दुर्रहमान बिन औफ रज़ि अल्लाहु अन्हु का बयान है कि गजव_ए_बद्र के दिन मैं मुजाहेदीन की सफ में खड़ा था और मेरे दोनों जानिब दो नौ उम्र लड़के खड़े थे।

उनमें से एक ने राज़दारी से पूछा या अम्मे अरिनी अबी जहलिन  (बुखारी शरीफ जिल्द दोम स. 568)

ऐ चचा जान क्या आप अबू जहल का पता बता सकते हैं?

दूसरे नौ जवान ने भी यही पूछा ।

मैं ने उस से कहा कि क्यों? भतीजे तुम को अबू जहल से क्या काम है उस पर उन्होंने बड़ी बेबाकी और वेखौफी से कहा चचा जान यही तो वह खूंख्वार बद बख्त जालिम है जिस की शर अंगेजी इस दरजह को पहुंच चुकी है कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को गालियाँ तक देता है वह अल्लाह के रसूल का बहुत बड़ा दुश्मन है हम जरूर उस पर हमला आवर होंगे।

हजरत अब्दुर्रहमान बिन औफ रजि अल्लाहु अन्हु ने अबू जहल की निशानदेही कर दी फिर क्या था दोनों बच्चे शहबाजों की तरह अबू जहल पर झपट पड़ते हैं यहाँ तक कि अपनी तलवारों से मार मार कर अबू जहल को शदीद जख्मी कर देते हैं यह दोनों  हज़रते मऊज़ और मआज रजि अल्लाहु अन्हुमा थे जो इफरा के बेटे थे ।

अबू जहल के बेटे अकरमह ने अपने बाप के इन्तिकाम में हजरते मआज पर हमला कर दिया  (अकरमह उस वक्त हालते कुफ्र में थे)  सामने मुकाबला करने की हिम्मत न हुई तो पीछे से हज़रते मआज के बायें शाना पर तलवार पूरी ताकत से मारी जिस से उन का बाजू कट कर लटक गया ।

हज़रते मआज अकरमह का पीछा करके दूर तक दौड़ाते रहे मगर वह बच निकला हजरते मआज इस हालत में

▫पोस्ट-- 05 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हज़रते खुबैब रज़ि अल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि मैं अपनी कौम के एक शख्स के साथ एक गज़वह में नबि_ए_करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाजिर हुवा।

हमने अर्ज किया कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हम इस गज़वह में शरीक होने की ख्वाहिश रखते हैं।

सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया क्या तुम इस्लाम ले आए हो मैं ने अर्ज क्या क़ि नहीं, तो आप ने फ़रमाया हम मुश्रिकों के ख़िलाफ़ मुश्रिकों की मदद नहीं लेते हैं।

हज़रते खुबैव रजि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैं ने इस्लाम कुबूल कर लिया और आक़ा_ए_करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के हमराह जिहाद में शरीक हुवा ।

तलवारें चमकीं नेजे व भाले उठे, खनजर चलें, तीरों की बारिश हुई इस घमसान की जंग में दुश्मने दीन की तलवार मेरे कंधे पर पड़ी जिस से मेरा बाजु कट कर लटक गया।

मैं तबीबे दो जहाँ सरवरे सरवराँ ताजदारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाहे बेकस पनाह में हाजिर हुवा आप ने मेरे बाजू पर लुआबे दहन लगाया और उस की जगह जोड़ दिया। मेरा कटा हुवा बाजू अपनी जगह जुड़कर ठीक हो गया फिर उस शख्स क़त्ल करके उस की बेटी से निकाह कर लिया जिसने

▫पोस्ट-- 04 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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रसूले गिरामी वक़ार सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के लुआबे दहन से खारा पानी मीठा हो जाता था।

हज़रते सय्यदुना अनस रज़ि अल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि मेरे घर में एक कुआँ था जिस का पानी खारा था, एक मरतबा साहिबे लौलाक फख़्र_ए_मौजूदात जनाबे मुहम्मदुर्ररसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाए और मेरे घर के कुएं के पानी में अपना लुआबे दहन डाल दिया जिससे कुएं का पानी ऐसा ठंडा और मीठा हो गया कि सारे मदीने में ऐसा शीरीं और ठंडा

▫पोस्ट-- 03 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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जंगे उहद में बशीर बिन अक़रबह अलजुहनी रजि अल्लाहु अन्हु के वालिदे मोहतरम शहीद हो गए तो वह रोते हुए वालि_ए_दो जहाँ सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाहे अकदस में पहुँचे ।

सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया ऎ बशीर बिन अकरबह क्यों रोते हो? क्या तुम्हारे लिए बेहतर नहीं कि तेरा बाप वालि_ए_दो जहाँ हो? और तेरी माँ आयेशा सिद्दीक़ह हों?

उस के बाद सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उनके सर पर दस्ते रहमत फेरा। हज़रते बशीर बिन अक़रबह का बयान है कि आकाए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दस्ते मुबारक का यह असर कि जिन बालों को दस्ते रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का बोसह लेने का शर्फ हासिल हुवा वह सफेद न हुए हमेशा सियाह ही रहे और मेरी ज़बान में लुकनत थी आप ने अपना लुआबे दहन डाल दिया तो

▫पोस्ट-- 02 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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जंगे खैबर के मौका पर बड़े बड़े सूरमा जाँ_निसार सहाब_ए_किराम इस्लामी झंडा लहराते हुए किल_ए_कुमूस पर यलगार करते हैं लेकिन फ़तेह ना कर सके,

तो सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं - लऊतियन्ना हाजिहिरीयता गदन रजुलन यफतहुल्लाहु अला यदैहि युहिब्बुल्लाहा व रसूलहू (बुख़ारी शरीफ)

तर्जुमा : मैं कल ऐसे शख्स को झंडा अता करूंगा कि जिस के हाथों अल्लाह तआला फतेह अता फरमायेगा और वह अल्लाह और उस के रसूल से मुहब्बत रखता है।

इरशादे मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम सुनने के बाद हर एक सहाबी में फातहे खैबर बनने की तमन्ना जाग उठती है और हर सहाबी की यही ख्वाहिश है कि काश कल सुबह इस्लामी अलम मुझे मिल जाए और इस किला के फ़तेह का फख्र व शर्फ मुझे हासिल हो जाए।

वजह सिर्फ यह थी कि सहाबा का ईमान व अकीदह यह था कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के फरमान के मुताबिक कल यह किला जरूर फ़तेह हो जाएगा और मुखबिरे सादकि सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जिसे इस्लामी झंडा अता फ़रमायेंगे वही फातहे खैबर होगा, जिसका नाम इस्लामी तारीख में सुनहरे हुरूफ़ में लिखा जाएगा ।

शबे इंतिजार गुज़री सुबह की आमद हुई तो गैब_दाँ रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः ऐना अली इब्ने अबी तालिब अली इब्ने अबी तालिब कहाँ हैं?

सुबहानल्लाह यह दौलते बे बहा और निमते उजमा हज़रते

▫पोस्ट-- 01 | मोजिज़_ए_लुआबे दहन 💝

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हुजूर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बमौक_ए_हिजरत हज़रते अबू बकर सिद्दीक रजि अल्लाहु अन्हु के हमराह गारे सौर में जो जबले सौर में वाके है, तशरीफ ले गए।

यारे गारे मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अर्ज करते हैं कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आप बाहर ही तशरीफ़ रख्खें ताकि मैं जाकर गार को अच्छी तरह साफ़ कर लुँ।

चुनाँचे हज़रते अबू बकर सिद्दीक रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु गार के अंदर दाख़िल हुए और साफ किया जब उस के बालाई हिस्से में आए तो याद आया कि एक कोना सफ़ाई से बाकी रह गया है वापस जाकर उसे भी साफ करते हैं तमाम सूराखों कोअपनी उंगली से टटोल-टटोल कर बंद करते हैं मगर एक बड़ा सूराख बाकी रह जाता है जिस पे अपने पाओं की ऐड़ी रख देते हैं अचानक आपको साँप ने डस लिया।

सरकारे मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अबू बकर के जानों पर सर रख कर आराम फरमा रहे हैं साँप के काटने कि वजह से पाओं सूज गया और आँखें अश्क बार हो जाती हैं यहाँ तक कि आँसुओं के कतरे पलकों से ढलक कर रुख़े अनवर पर मोतियों की तरह बिखर जाते हैं।

सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं ऎ अबू बकर! यह क्या हुवा ?

अर्ज करते हैं : साँप ने काट लिया है ।

सय्यदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं तुम ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया ?

अर्ज करते हैं कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैं नहीं चाहता था कि आप की नींद को परेशान करूं ।

हुजूर इरशाद फरमाते हैं पाओं बाहर निकालो ।

अबू बकर पाओं बाहर निकालते हैं सरकारे दो आलम सल्लल्लाह तआला अलैहि वसल्लम अपना लुआबे दहन शरीफ़ लगा कर दस्ते रहमत फेरते हैं फिर क्या था अचानक