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▫️हिस्सा-1 | हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम
◆ रिवायतें तो आपके बारे में बेशुमार हैं मगर आपकी विलादत और हालात पर
ज़्यादा मालूमात किताबों में दर्ज नहीं है । एक रिवायत के मुताबिक आपका नाम
बलिया इब्ने मल्कान कुन्नियत अबुल अब्बास और लक़ब खिज़्र है । हज़रत ज़ुलकरनैन
साम बिन नूह अलैहिस्सलाम की औलाद हैं और आप हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर
ईमान लायें यानि ताईद की । आपका लक़ब खिज़्र होने की वजह ये बताई जाती है कि
आप जहां बैठ जाते वहां सब्ज़ा उग जाता इसलिए आपको खिज़्र यानि सब्ज़ कहा जाने
लगा । आपके अंगूठे में हड्डी नहीं है और उनका अंगूठा मिस्ल बाकी उंगलियों
के बराबर है और मशहूर है कि एक मुसलमान से उसकी पूरी ज़िन्दगी में आप एक
मर्तबा मुसाफा ज़रूर करते हैं । आपने अपने बाद के तक़रीबन हर नबी व ज़्यादातर
औलिया से मुलाक़ात की है ।
📕 रिजालुल ग़ैब, सफह 134-141
★ आलाहज़रत अज़ीमुल बरक़त रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि चार नबी अब भी ज़िंदा हैं हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ये दोनों हज़रात आसमान पर हैं और हज़रत इल्यास अलैहिस्सलाम खुश्की में भटक जाने वालों को राह दिखाने के काम में और हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम पानी में भटक जाने वालों को राह दिखाने की खिदमत से मुअल्लक़ हैं । हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से आपकी मुलाकात साबित है ।
📕 अलमलफूज़, हिस्सा 4, सफह 40
आपका नाम तो क़ुर्आन में ज़ाहिरन नहीं लिखा है मगर आपके मुताल्लिक़ इशारा ज़रूर है । सूरह कहफ आयत 65 के बाद आपके 2 सफर का तज़किरा है पहला तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से मुलाकात और दूसरा हज़रत ज़ुलकरनैन के साथ आबे हयात का सफर करना और उसे पीकर हमेशा की ज़िन्दगी पा लेना तो चलिये इसी सफर से शुरुआत करते हैं ।
अब तक 4 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया पर हुक़ूमत की है दो मोमिन, हज़रत सिकंदर ज़ुलरनैकन और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम और दो काफिर, नमरूद और बख्ते नस्र, और अनक़रीब पांचवे बादशाह हज़रत इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु होंगे जो पूरी दुनिया पर हुक़ूमत करेंगे । जिस सिकन्दर का किस्सा हम लोगों ने दुनियावी इतिहास की किताबों मे पढ़ा है वो सिकन्दर युनानी था जो कि काफिरो मुशरिक था मगर सिकन्दर ज़ुलरनैकन दूसरे हैं आप सालेह मोमिन थे ।
📕 अलइतक़ान, जिल्द 2, सफह 178
■ हज़रत सिकंदर ज़ुलकरनैन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ज़माने के थे और आप हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर ईमान लाये और उनके साथ तवाफे काबा भी किया । चुंकि हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम भी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बारगाह में हाज़िरी देते थे, जहां ज़ुलकरनैन की हज़रते खिज़्र अलैहिस्सलाम से मुलाकात हुई और उनकी शख्सियत इल्मो अखलाक़ को देखकर हज़रते ज़ुलकरनैन ने उन्हें अपना खास और वज़ीर बना लिया । हज़रत सिकन्दर ज़ुलरनैकन ने किताबों में पढ़ा कि औलादे साम में से एक शख्स आबे हयात तक पहुंचेगा और उसे पा लेगा जिससे कि उसे मौत ना आयेगी । ये पढ़कर आपने एक अज़ीम लश्कर तैयार किया जो कि मग़रिबो शिमाल की जानिब रवाना हुआ । आपके साथ आपके वज़ीर हज़रते ख़िज़्र अलैहिस्सलाम भी चले। पानी का सफर खत्म होते होते वो एक ऐसी जगह पहुंचे जहां दलदल के सिवा कुछ ना था, कश्तियां भी ना चल सकती थी मगर अज़्म के मज़बूत हज़रत ज़ुलकरनैन ने उन कीचड़ों पर भी कश्तियां चलवा दी । वहां एक जगह उन्हें सूरज कीचड में डूबता हुआ मालूम हुआ वहां से निकलकर वो एक ऐसी वादी में पहुंचे जहां एक क़ौम आबाद थी मगर वहां के लोग तहज़ीब और तमद्दुन से बिल्कुल खाली थे, जो जानवरों का कच्चा गोश्त खाते उन्ही के खालों का कपड़ा पहनते, उनका ना तो कोई दीन था और ना मज़हब, आपने उन लोगों को दीने इस्लाम की दावत पेश की जिसे उन लोगों ने क़ुबूल फरमाया और फिर उन लोगों ने याजूज माजूज की शिकायत पेश की, कि पहाड़ के पीछे से एक क़ौम हमला करती है जो हमारा सब कुछ बर्बाद कर देती है । आप हमें उस ज़ालिम क़ौम से बचायें, तब हज़रत ज़ुलकरनैन ने दो पहाड़ों के दरमियान एक दीवार क़ायम फरमाई वो दीवार तक़रीबन 160 किलोमीटर लम्बी 150 फिट चौड़ी और 600 फिट ऊंची है, इसको सिद्दे सिकंदरी कहा जाता है इसको इस तरह बनाया गया कि पहले पानी की तह तक बुनियाद खोदी गई और तह में पत्थर, पिघलाये हुए तांबे में जमाये गये, फिर लोहे की तख्ती चारों तरफ लगाकर उसके अन्दर लकड़ी और कोयला भरा गया नीचे आग लगाकर ऊपर से पिघला हुआ तांबा उसके ज़र्रे ज़र्रे में पहुंचाया गया इस तरह हज़रत ज़ुलकरनैन सिद्दे सिकंदरी बनाकर आबे हयात की तलाश में
📕 रिजालुल ग़ैब, सफह 134-141
★ आलाहज़रत अज़ीमुल बरक़त रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि चार नबी अब भी ज़िंदा हैं हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ये दोनों हज़रात आसमान पर हैं और हज़रत इल्यास अलैहिस्सलाम खुश्की में भटक जाने वालों को राह दिखाने के काम में और हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम पानी में भटक जाने वालों को राह दिखाने की खिदमत से मुअल्लक़ हैं । हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से आपकी मुलाकात साबित है ।
📕 अलमलफूज़, हिस्सा 4, सफह 40
आपका नाम तो क़ुर्आन में ज़ाहिरन नहीं लिखा है मगर आपके मुताल्लिक़ इशारा ज़रूर है । सूरह कहफ आयत 65 के बाद आपके 2 सफर का तज़किरा है पहला तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से मुलाकात और दूसरा हज़रत ज़ुलकरनैन के साथ आबे हयात का सफर करना और उसे पीकर हमेशा की ज़िन्दगी पा लेना तो चलिये इसी सफर से शुरुआत करते हैं ।
अब तक 4 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया पर हुक़ूमत की है दो मोमिन, हज़रत सिकंदर ज़ुलरनैकन और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम और दो काफिर, नमरूद और बख्ते नस्र, और अनक़रीब पांचवे बादशाह हज़रत इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु होंगे जो पूरी दुनिया पर हुक़ूमत करेंगे । जिस सिकन्दर का किस्सा हम लोगों ने दुनियावी इतिहास की किताबों मे पढ़ा है वो सिकन्दर युनानी था जो कि काफिरो मुशरिक था मगर सिकन्दर ज़ुलरनैकन दूसरे हैं आप सालेह मोमिन थे ।
📕 अलइतक़ान, जिल्द 2, सफह 178
■ हज़रत सिकंदर ज़ुलकरनैन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ज़माने के थे और आप हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर ईमान लाये और उनके साथ तवाफे काबा भी किया । चुंकि हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम भी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बारगाह में हाज़िरी देते थे, जहां ज़ुलकरनैन की हज़रते खिज़्र अलैहिस्सलाम से मुलाकात हुई और उनकी शख्सियत इल्मो अखलाक़ को देखकर हज़रते ज़ुलकरनैन ने उन्हें अपना खास और वज़ीर बना लिया । हज़रत सिकन्दर ज़ुलरनैकन ने किताबों में पढ़ा कि औलादे साम में से एक शख्स आबे हयात तक पहुंचेगा और उसे पा लेगा जिससे कि उसे मौत ना आयेगी । ये पढ़कर आपने एक अज़ीम लश्कर तैयार किया जो कि मग़रिबो शिमाल की जानिब रवाना हुआ । आपके साथ आपके वज़ीर हज़रते ख़िज़्र अलैहिस्सलाम भी चले। पानी का सफर खत्म होते होते वो एक ऐसी जगह पहुंचे जहां दलदल के सिवा कुछ ना था, कश्तियां भी ना चल सकती थी मगर अज़्म के मज़बूत हज़रत ज़ुलकरनैन ने उन कीचड़ों पर भी कश्तियां चलवा दी । वहां एक जगह उन्हें सूरज कीचड में डूबता हुआ मालूम हुआ वहां से निकलकर वो एक ऐसी वादी में पहुंचे जहां एक क़ौम आबाद थी मगर वहां के लोग तहज़ीब और तमद्दुन से बिल्कुल खाली थे, जो जानवरों का कच्चा गोश्त खाते उन्ही के खालों का कपड़ा पहनते, उनका ना तो कोई दीन था और ना मज़हब, आपने उन लोगों को दीने इस्लाम की दावत पेश की जिसे उन लोगों ने क़ुबूल फरमाया और फिर उन लोगों ने याजूज माजूज की शिकायत पेश की, कि पहाड़ के पीछे से एक क़ौम हमला करती है जो हमारा सब कुछ बर्बाद कर देती है । आप हमें उस ज़ालिम क़ौम से बचायें, तब हज़रत ज़ुलकरनैन ने दो पहाड़ों के दरमियान एक दीवार क़ायम फरमाई वो दीवार तक़रीबन 160 किलोमीटर लम्बी 150 फिट चौड़ी और 600 फिट ऊंची है, इसको सिद्दे सिकंदरी कहा जाता है इसको इस तरह बनाया गया कि पहले पानी की तह तक बुनियाद खोदी गई और तह में पत्थर, पिघलाये हुए तांबे में जमाये गये, फिर लोहे की तख्ती चारों तरफ लगाकर उसके अन्दर लकड़ी और कोयला भरा गया नीचे आग लगाकर ऊपर से पिघला हुआ तांबा उसके ज़र्रे ज़र्रे में पहुंचाया गया इस तरह हज़रत ज़ुलकरनैन सिद्दे सिकंदरी बनाकर आबे हयात की तलाश में
▫️हिस्सा-2 | हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम
अब हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम का दूसरा वाक़िया सुनिये इसका भी ज़िक्र क़ुर्आन में मौजूद है -
■ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि एक मर्तबा बनी इस्राईल ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से पूछा कि इस वक़्त रूए ज़मीन पर सबसे बड़ा आलिम कौन है तो आपने फरमाया कि मैं हूं, आपकी इस बात में थोड़ा सा ग़ुरूर का पहलु था लिहाज़ा रब ने इताब फरमाते हुए उनसे कहा कि ऐ मूसा तुमसे बड़ा आलिम भी इस ज़मीन पर मौजूद है यानि कि हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम, उनका ज़िक्र मौला तआला क़ुर्आन मुक़द्दस में कुछ युं इरशाद फरमाता है ~
कंज़ुल ईमान - तो हमारे बन्दों में से एक बन्दा पाया जिसे हमने अपने पास से रहमत दी और उसे अपना इल्मे लदुन्नी अता किया ।
★ अब जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने सुना तो अपने कहे पर नादिम हुए और उस शख्स से मिलने की इल्तिजा की, रब ने उन्हें अपने साथ एक भुनी हुई मछली लेकर सफर करने को कहा और फरमाया कि जहां पर दो समन्दर यानि बहरे फारस और बहरे रूम मिलेंगे यानि मजमउल बहरैन तो वहीं पर तुम्हारी ये मछली पानी में गुम हो जायेगी और तुम उनको पा सकोगे । हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अपने होने वाले वली-अहद हज़रत यूशअ बिन नून अलैहिस्सलाम के साथ एक मछली को लेकर दो समन्दरों के मिलने की जगह को ढूंढ़ने निकल पड़े, दोनों हज़रात ने पानी का सफर शुरू किया एक जगह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को नींद आ गयी और वो भुनी हुई मछली जिंदा होकर पानी में कूद गयी और एक कोह सा रास्ता बनाते हुए निकल गयी हज़रत यूशअ अलैहिस्सलाम ने देखा तो मगर उन्हें हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को बताना याद ना रहा और सफर जारी रखा, कुछ देर बाद जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की आंख खुली तो आपने खाने के लिए वही मछली मांगी तब हज़रत यूशअ अलैहिस्सलाम को ख्याल आया और उन्होंने सारी बात हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम बताई, तब दोनों हज़रात वापस लौटे और वहीं पहुंचे तो देखा कि पानी ठहरा हुआ है और उसमे मेहराब की तरह रास्ता बना हुआ है दोनों उसी रास्ते पर चल दिए कुछ दूर आगे बढे तो एक चट्टान के करीब एक शख्स चादर ओढ़े लेटा हुआ था, यही हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे, दोनों हज़रात उनके पास पहुंचे सलाम किया जवाब मिला, तब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें अपने आने का मक़सद बताया कि उन्हें भी कुछ इल्म हासिल करना है । लिहाज़ा उन्हें अपने साथ रखें, मगर हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने मना किया कि तुम हमारे साथ हरगिज़ ना रह सकोगे क्योंकि हमारे काम पर तुमसे सब्र ना हो सकेगा । इस पर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि बेशक मैं सब्र करूंगा तो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने इस शर्त पर कि आप उनसे कोई सवाल नहीं करेंगे उन्हें अपने साथ रहने की इजाज़त दे दी ।
अब वो तीनो एक साहिल पर पहुंचे बहुत कोशिश की कि कोई नाव वाला उन्हें दरिया के उस पार छोड़ दे मगर उनके पास दरहमो दीनार ना थे लिहाज़ा कीमत ना मिलने की वजह से किसी ने भी उन्हें उस पार नहीं पहुंचाया, आखिरकार एक नेक कश्ती वाले ने बिना कीमत के आप लोगों को उस पार छोड़ने के लिए कश्ती में बिठा लिया मगर जब कश्ती बीच रास्ते में पहुंची तो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने उसकी कश्ती तोड़ डाली और उसमे छेद
■ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि एक मर्तबा बनी इस्राईल ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से पूछा कि इस वक़्त रूए ज़मीन पर सबसे बड़ा आलिम कौन है तो आपने फरमाया कि मैं हूं, आपकी इस बात में थोड़ा सा ग़ुरूर का पहलु था लिहाज़ा रब ने इताब फरमाते हुए उनसे कहा कि ऐ मूसा तुमसे बड़ा आलिम भी इस ज़मीन पर मौजूद है यानि कि हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम, उनका ज़िक्र मौला तआला क़ुर्आन मुक़द्दस में कुछ युं इरशाद फरमाता है ~
कंज़ुल ईमान - तो हमारे बन्दों में से एक बन्दा पाया जिसे हमने अपने पास से रहमत दी और उसे अपना इल्मे लदुन्नी अता किया ।
★ अब जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने सुना तो अपने कहे पर नादिम हुए और उस शख्स से मिलने की इल्तिजा की, रब ने उन्हें अपने साथ एक भुनी हुई मछली लेकर सफर करने को कहा और फरमाया कि जहां पर दो समन्दर यानि बहरे फारस और बहरे रूम मिलेंगे यानि मजमउल बहरैन तो वहीं पर तुम्हारी ये मछली पानी में गुम हो जायेगी और तुम उनको पा सकोगे । हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अपने होने वाले वली-अहद हज़रत यूशअ बिन नून अलैहिस्सलाम के साथ एक मछली को लेकर दो समन्दरों के मिलने की जगह को ढूंढ़ने निकल पड़े, दोनों हज़रात ने पानी का सफर शुरू किया एक जगह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को नींद आ गयी और वो भुनी हुई मछली जिंदा होकर पानी में कूद गयी और एक कोह सा रास्ता बनाते हुए निकल गयी हज़रत यूशअ अलैहिस्सलाम ने देखा तो मगर उन्हें हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को बताना याद ना रहा और सफर जारी रखा, कुछ देर बाद जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की आंख खुली तो आपने खाने के लिए वही मछली मांगी तब हज़रत यूशअ अलैहिस्सलाम को ख्याल आया और उन्होंने सारी बात हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम बताई, तब दोनों हज़रात वापस लौटे और वहीं पहुंचे तो देखा कि पानी ठहरा हुआ है और उसमे मेहराब की तरह रास्ता बना हुआ है दोनों उसी रास्ते पर चल दिए कुछ दूर आगे बढे तो एक चट्टान के करीब एक शख्स चादर ओढ़े लेटा हुआ था, यही हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे, दोनों हज़रात उनके पास पहुंचे सलाम किया जवाब मिला, तब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें अपने आने का मक़सद बताया कि उन्हें भी कुछ इल्म हासिल करना है । लिहाज़ा उन्हें अपने साथ रखें, मगर हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने मना किया कि तुम हमारे साथ हरगिज़ ना रह सकोगे क्योंकि हमारे काम पर तुमसे सब्र ना हो सकेगा । इस पर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि बेशक मैं सब्र करूंगा तो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने इस शर्त पर कि आप उनसे कोई सवाल नहीं करेंगे उन्हें अपने साथ रहने की इजाज़त दे दी ।
अब वो तीनो एक साहिल पर पहुंचे बहुत कोशिश की कि कोई नाव वाला उन्हें दरिया के उस पार छोड़ दे मगर उनके पास दरहमो दीनार ना थे लिहाज़ा कीमत ना मिलने की वजह से किसी ने भी उन्हें उस पार नहीं पहुंचाया, आखिरकार एक नेक कश्ती वाले ने बिना कीमत के आप लोगों को उस पार छोड़ने के लिए कश्ती में बिठा लिया मगर जब कश्ती बीच रास्ते में पहुंची तो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने उसकी कश्ती तोड़ डाली और उसमे छेद
▫️हिस्सा-3 | हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम
■
फिर तीनों एक बस्ती में पहुंचे जहां किसी ने भी इनकी मेहमान नवाज़ी नहीं
की दिन भर भूखे प्यासे पूरे गांव में चक्कर काटते रहे, थक हारकर शाम को
बस्ती से चलने लगे जब गांव के बाहर पहुंचे तो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ने
देखा कि एक दीवार गिरी जाती है आप फौरन वहां पहुंचे और पूरी मेहनत से गिरती
हुई दीवार की मरम्मत की उसे सीधी की और कोई उजरत भी नहीं ली, इस पर हज़रत
मूसा अलैहिस्सलाम फिर से बोले कि जिस बस्ती वालों ने हमारे लिए कुछ भी नहीं
किया आपने युंही बग़ैर उजरत के उनकी दीवार सही कर दी कम से कम उजरत तो ले
लेते, अब हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि तुम्हारा उज़्र पूरा हो चुका
अब तुम हमारे साथ नहीं रह सकते मगर जाते जाते उन तीनों के बातिनी हालात भी
सुनते जाओ ।
पहली वो जो कश्ती मैंने तोड़ी थी, तो वहां का बादशाह बहुत ही ज़ालिम है सभी कश्ती वालों की नई कश्तियां छीन कर अपने खज़ाने में जमा कर लेता है, अगर मैं उस गरीब की कश्ती ना तोड़ता तो उसकी कश्ती भी उससे छिन जाती और उस पर रिज़्क़ की क़िल्लत आ जाती लिहाज़ा जो एहसान उसने हम पर किया था बग़ैर उजरत के दरिया को पार कराने का उसी एहसान का ये बदला था कि कश्ती तो फिर से दुरुस्त कर ही लेगा ।
दूसरा वो नाबालिग़ बच्चा जिसे मैंने क़त्ल किया उसके मां-बाप मोमिन थे और उसको बड़ा होकर काफिर होना था तो औलाद की मुहब्बत में उसके मां-बाप का ईमान खतरे में पड़ जाता लिहाज़ा उनका ईमान बचाने के लिए मैंने उसे क़त्ल किया और बचपन में चुंकि वो खुद अब तक वो खुद भी काफिर नहीं था लिहाज़ा उस पर भी एहसान किया।
और तीसरी ये दीवार जो मैंने दुरुस्त की तो ये घर दो यतीम बच्चों का है इस दीवार के नीचे उन बच्चों के बाप ने जो कि नेक आदमी था उसने इनके लिए कुछ रुपया पैसा छोड़ा है अगर ये दीवार गिर जाती तो वो खज़ाना खुल जाता और बस्ती वाले सब लूटकर ले जाते अब जब बच्चे बड़े हो जायेंगे और अपना घर मरम्मत करायेंगे तो उनका खज़ाना उनको मिल जायेगा, फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम वहां से वापस लौट आये ।
📕 पारा 15,सूरह कहफ,आयत 60-82
📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 331
वैसे तो ये पूरा वाक़िया ही क़ुर्आन में दर्ज है मगर इसके आखिरी के जुमलों पर कुछ तवज्जोह दिलाना चाहता हूं, रब तआला फरमाता है ~
कंज़ुल ईमान - और उनका बाप नेक आदमी था ।
📕 पारा 16, सूरह कहफ, आयत 82
तफसीर - उन दोनो बच्चों का नाम अदरम और सुरैन था और उनके बाप का नाम कासिख था और ये शख्स
पहली वो जो कश्ती मैंने तोड़ी थी, तो वहां का बादशाह बहुत ही ज़ालिम है सभी कश्ती वालों की नई कश्तियां छीन कर अपने खज़ाने में जमा कर लेता है, अगर मैं उस गरीब की कश्ती ना तोड़ता तो उसकी कश्ती भी उससे छिन जाती और उस पर रिज़्क़ की क़िल्लत आ जाती लिहाज़ा जो एहसान उसने हम पर किया था बग़ैर उजरत के दरिया को पार कराने का उसी एहसान का ये बदला था कि कश्ती तो फिर से दुरुस्त कर ही लेगा ।
दूसरा वो नाबालिग़ बच्चा जिसे मैंने क़त्ल किया उसके मां-बाप मोमिन थे और उसको बड़ा होकर काफिर होना था तो औलाद की मुहब्बत में उसके मां-बाप का ईमान खतरे में पड़ जाता लिहाज़ा उनका ईमान बचाने के लिए मैंने उसे क़त्ल किया और बचपन में चुंकि वो खुद अब तक वो खुद भी काफिर नहीं था लिहाज़ा उस पर भी एहसान किया।
और तीसरी ये दीवार जो मैंने दुरुस्त की तो ये घर दो यतीम बच्चों का है इस दीवार के नीचे उन बच्चों के बाप ने जो कि नेक आदमी था उसने इनके लिए कुछ रुपया पैसा छोड़ा है अगर ये दीवार गिर जाती तो वो खज़ाना खुल जाता और बस्ती वाले सब लूटकर ले जाते अब जब बच्चे बड़े हो जायेंगे और अपना घर मरम्मत करायेंगे तो उनका खज़ाना उनको मिल जायेगा, फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम वहां से वापस लौट आये ।
📕 पारा 15,सूरह कहफ,आयत 60-82
📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 331
वैसे तो ये पूरा वाक़िया ही क़ुर्आन में दर्ज है मगर इसके आखिरी के जुमलों पर कुछ तवज्जोह दिलाना चाहता हूं, रब तआला फरमाता है ~
कंज़ुल ईमान - और उनका बाप नेक आदमी था ।
📕 पारा 16, सूरह कहफ, आयत 82
तफसीर - उन दोनो बच्चों का नाम अदरम और सुरैन था और उनके बाप का नाम कासिख था और ये शख्स
▫️हिस्सा-4 | हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम
■
हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम और हज़रत इल्यास अलैहिस्सलाम दोनों हर साल हज के
मौक़े पर मिलते हैं हज व उमरा करते हैं आबे ज़म-ज़म शरीफ पीते हैं जो कि
उनके लिए साल भर की ग़िज़ा का काम करता है, और बैतुल मुक़द्दस में दोनों हज़रात
रमज़ान शरीफ का रोज़ा भी रखा करते हैं ।
📕 फतावा रज़वियह, जिल्द 9, सफह 108
📕 ज़रक़ानी, जिल्द 5, सफह 354
★ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम और हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ~
एक मर्तबा हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मस्जिदे नब्वी शरीफ में थे कि किसी की आवाज़ सुनी तो आपने हज़रते अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को भेजा और कहा कि उनको मेरा सलाम कहो और कहो कि मेरे लिए दुआ करें, जब हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उनसे जाकर कहा तो जवाब देने के बाद वो कहने लगे कि मैं क्या उनके लिए दुआ कर सकता हूं उन्हें तो तमाम अम्बिया का सरदार बनाया गया है । हम तो खुद उनकी दुआ के मोहताज हैं । हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वापस आये और उनका पैगाम सुनाया तो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि वो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे ।
◆ इसी तरह हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के विसाल के दिन एक शख्स सफों को चीरता हुआ आगे पहुंचा और सहाबा को तसल्ली दी और फिर वो गायब हो गया तो हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से फरमाते हैं कि ये हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे तो आप फरमाते हैं कि बिल्कुल मैं उन्हें पहचानता हूं ।
● इसी तरह एक मर्तबा हज़रते उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक नमाज़े जनाज़ा में शिरकत के लिए खड़े हुए तो दूर से एक शख्स ने आवाज़ दी कि रुकिये मैं भी शामिल होता हूं, बाद नमाज़ जब उनको ढूंढा गया तो ना मिले तो हज़रत उमर फारूक़े आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि ये हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे ।
◆ इसके अलावा और भी सहाबाये किराम से मुलाकात का तज़किरा मिलता है और बहुत से बुज़ुर्गाने दीन से भी आपकी मुलाकात साबित है, सबका ज़िक्र करने के बजाये उन बुज़ुर्गों के नाम पर ही इक़्तिफा करता हूं -
हज़रत दाता गंज बख्श लाहौरी
हज़रत मखदूम अशरफ जहांगीर समनानी
हज़रत ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंदी
हज़रत ख्वाजा अब्दुल खालिक़ गज्दवानी
हुज़ूर ग़ौसे पाक
हुज़ूर मोहिउद्दीन इब्ने अरबी
हज़रत इमाम अहमद बिन हम्बल
हज़रत निज़ामी गंजवी
हज़रत अहमद बिन अल्वी
हज़रत शाह रुक्न आलम मुल्तानी
हज़रत अब्दुल क़ाहिर सुहरवर्दी
हज़रत बिशर बिन हारिस
हज़रत ख्वाजा अब्दुल्लाह अंसारी
हज़रत अब्दुल शैख कैलवी
हज़रत मौलाना जलालुद्दीन रूम
हज़रत शैख सादी
हज़रत ख्वाजा सुलेमान तस्वी
हज़रत ख्वाजा शम्सुद्दीन सियाल्वी
हज़रत इब्ने जौज़ी
हज़रत शैख बदरुद्दीन ग़ज़नवी
हज़रत अब्दुल वहाब मुत्तक़ी
हज़रत जाफर मक्की सरहिंदी
हज़रत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
हज़रत मुहम्मद बिन समाक
हज़रत अबुल हसन शीराज़ी
हज़रत शैक अबु मदयन
हज़रत अब्दुर्रहमान छुहरावी
📕 रिजालुल ग़ैब, सफह 154-198
ये कुछ हज़राते मुक़द्दसा के नाम हैं जिनके बारे में तफ्सील से किताब में लिखा है और जिस तरतीब से
📕 फतावा रज़वियह, जिल्द 9, सफह 108
📕 ज़रक़ानी, जिल्द 5, सफह 354
★ हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम और हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम ~
एक मर्तबा हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मस्जिदे नब्वी शरीफ में थे कि किसी की आवाज़ सुनी तो आपने हज़रते अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को भेजा और कहा कि उनको मेरा सलाम कहो और कहो कि मेरे लिए दुआ करें, जब हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उनसे जाकर कहा तो जवाब देने के बाद वो कहने लगे कि मैं क्या उनके लिए दुआ कर सकता हूं उन्हें तो तमाम अम्बिया का सरदार बनाया गया है । हम तो खुद उनकी दुआ के मोहताज हैं । हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वापस आये और उनका पैगाम सुनाया तो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि वो हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे ।
◆ इसी तरह हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के विसाल के दिन एक शख्स सफों को चीरता हुआ आगे पहुंचा और सहाबा को तसल्ली दी और फिर वो गायब हो गया तो हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से फरमाते हैं कि ये हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे तो आप फरमाते हैं कि बिल्कुल मैं उन्हें पहचानता हूं ।
● इसी तरह एक मर्तबा हज़रते उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक नमाज़े जनाज़ा में शिरकत के लिए खड़े हुए तो दूर से एक शख्स ने आवाज़ दी कि रुकिये मैं भी शामिल होता हूं, बाद नमाज़ जब उनको ढूंढा गया तो ना मिले तो हज़रत उमर फारूक़े आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि ये हज़रत खिज़्र अलैहिस्सलाम थे ।
◆ इसके अलावा और भी सहाबाये किराम से मुलाकात का तज़किरा मिलता है और बहुत से बुज़ुर्गाने दीन से भी आपकी मुलाकात साबित है, सबका ज़िक्र करने के बजाये उन बुज़ुर्गों के नाम पर ही इक़्तिफा करता हूं -
हज़रत दाता गंज बख्श लाहौरी
हज़रत मखदूम अशरफ जहांगीर समनानी
हज़रत ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंदी
हज़रत ख्वाजा अब्दुल खालिक़ गज्दवानी
हुज़ूर ग़ौसे पाक
हुज़ूर मोहिउद्दीन इब्ने अरबी
हज़रत इमाम अहमद बिन हम्बल
हज़रत निज़ामी गंजवी
हज़रत अहमद बिन अल्वी
हज़रत शाह रुक्न आलम मुल्तानी
हज़रत अब्दुल क़ाहिर सुहरवर्दी
हज़रत बिशर बिन हारिस
हज़रत ख्वाजा अब्दुल्लाह अंसारी
हज़रत अब्दुल शैख कैलवी
हज़रत मौलाना जलालुद्दीन रूम
हज़रत शैख सादी
हज़रत ख्वाजा सुलेमान तस्वी
हज़रत ख्वाजा शम्सुद्दीन सियाल्वी
हज़रत इब्ने जौज़ी
हज़रत शैख बदरुद्दीन ग़ज़नवी
हज़रत अब्दुल वहाब मुत्तक़ी
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