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सबसे ज्यादा अहमक

🌀पोस्ट- 91,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ सुल्तान महमुद गजनवी (रहमतुल्लाह अलैह) एक दफा अपने एक मातेहत से कहा की एक ऐसा शख्स ढ़ुंढ़कर लाओ जो सबसे जयादा अहमक (बेवकुफ) हो। यह सुनकर वह ऐसे शख्स की तलाश मे निकल खड़ा हुआ। आखीर उन्होने देखा की एक शख्स दरख्त की शाख पर बैठा उसी को काट रहा था।

सुल्तान के आदमी ने उस शख्स को डाल से उतारकर पकड़ा और सुल्तान के पास ले आया। अर्ज की हुजुर! यह शख्स बड़ा बेवकुफ और अहमक है। इसे हमने इस हालत मे पाया की यह एक पेड़ की डाल पर बैठा उसी को कुल्हाड़ी से मार रहा था। सुल्तान ने कहा : की यह शख्स वकाई बड़ा अहमक है मगर यह बताओ इससे से भी ज्यदा अहमक कौन हो सकता है??

अर्ज किया हुजूर खुद ही फरमायें। सुल्तान महमुद गजनवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने जवाब दिये वह हाकीम सबसे

शाही फरमान

🌀पोस्ट- 90,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️खलीफा हारुन रशीद के बेटे मामुन रशीद के दौर में एक मुजरिम शहर से भाग गया। खलीफा ने उसके भाई को पकड़ कर मंगाया और कहा की अपने भाई को हाजीर करो वरना तुम कत्ल कर दिये जाओगे। उसने अर्ज किया कि ऐ खलीफा! अगर तुम्हारा मातेहत हाकीम किसी को कत्ल करना चाहे और तु हुक्म दे की इसे छोड़ दे तो वह छोड़ेगा या नही??

मामुन रशीद ने कहा : हां छोड़ेगा। अब मैं तुम्हारे सामने उस सबसे बड़ा बादशाह का हुक्म पेश करता हुँ, जिसकी इनायत से तु हाकीम बना है की मुझे रिहा कर दे। मामुन रशीद ने कहा वह हुक्म मुझे सुनाओ। कहा वह

पुल सिरात

🌀पोस्ट- 89  |   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज (रजी अल्लाहु अन्हु) की एक बांदी ने एक रोज सुबह अर्ज की: अमीरुल मोमीनीन! आज रात मैने एक ख्वाब देखा।

आप ने फरमाया:- ब्यान कर । वह बोली मैने देखा दोजख भड़काई गयी है। पुलसिरात उस पर रखा गया है। बाज खुल्फा को फरिश्ते लाए हैं। उसे हुक्म दिया गया पुल सिरात पर चल। वह थोड़ा सा चला की दोजख मे गीर गया।

हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज बोले: फिर क्या हुआ?? जल्दी ब्यान करो।

वह बोली :- फिर मरवान के बेटे वलीद को लाया गया वह भी इसी तरह दोजख मे गीर गया।

आप बेचैनी से बोले : जल्दी से बोलो फिर क्या हुआ??

वह बोली : की फिर इब्ने अब्दुल मलीक को लाए वह भी इसी तरह दोजख मे गीर गया।

आपने कहा: फिर क्या देखा?? वह बोली : फिर आपको लाया गया। बांदी ने इतना ही कहा था की हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज ने एक नारा मारा और बेहोश होकर गीर पड़े। इस डर से की कहीं मुझे भी इसी तरह दोजख

अद्ल व इंसाफ

🌀पोस्ट- 88,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ जंगे बदर में हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) अपने हाथ मुबारक में एक तीर पकड़कर मुजाहिदिन की सफे दुरुस्त फरमा रहे थे। हजरत सवाद (रजी अल्लाहु अन्हु) सफ से बाहर निकले हुए थे।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उस तीर से हजरत सवाद की पीठ से छुकर फरमाया:-
ऐ सवाद! सफ के बराबर हो जाओ।

हजरत सवाद (रजी अल्लाहु अन्हु) ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! आपके तीर के मेरे बदन के साथ छु जाने से मुझे ठोकर सी लगी है मैं इसका बदला लेना चहता हुँ।

हुजुर आप अद्ल व इंसाफ के चश्मे और खजाने हैं मुझे इसका बदला लेने दिजीए। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने वही तीर हजरत सवाद को दिया और कहा लो तुम भी इस तीर से मेरे बदन पर ठोकर लगा दो।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) बदला देने को अपनी कमीज पुश्त अनवर (पिठ मुबारक) से उठाई तो हजरत सवाद ने हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के बदन अनवर से चिमटकर मोहरे नूबुव्वत को चूम लिया और अर्ज किया मेरे आका! मैनें तो इस बहाने से अपना बदन आपके बदन अनवर से लगाया है ताकी बदने

जन्नत का चश्मा

🌀पोस्ट- 87,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ जब मुहाजिरीन मक्का मोअज्जमा से हिजरत करके मदीनाए मुनव्वरा में आये तो यहाँ का पानी पसंद न आया जो खारी था।

मदीना मुनव्वरा मे एक शख्स की मिल्क में चश्मा था, जिसका नाम रौम था। वह शख्स अपने चश्मे का पानी किसी कीमत न देता था।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उससे फरमाया कि तुम यह चश्मा मेरे हाथ जन्नत के चश्मे के बदले बेच दो और जन्नत का चश्मा मुझसे ले लो । उसने अर्ज किया: या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मेरे और मेरे बाल बच्चो की रोजी इसी से है। मुझमे ताकत नही।

यह खबर हजरत उसमान गनी (रजी अल्लाहु अन्हु) को पहुंची तो आपने 35 हजार दिरहम नगद देकर उस शख्स को खरिद लिया।

फिर हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की खिदमत मे हाजीर होकर अर्ज किया या रसुलल्लाह! जिस तरह

»» मां ««

🌀पोस्ट- 86,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ एक शख्स ने ख्वाब में देखा की हजरत अबु इस्हाक रहमतुल्लाह अलैह की दाढ़ी मुबारक याकुत और जवाहरात से सजी हैं।

उस शख्स ने सुबह हजरत इस्हाक रहमतुल्लाह अलैह के पास पहुंचकर ख्वाब ब्यान किया तो अबु इस्हाक रहमतुल्लाह अलैह फरमाने लगे तुने सच कहा! मैने कल अपनी मां के कदम चुमे थे यह उसी के बदौलत

एक हाशमी औरत

🌀पोस्ट- 85,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ मदीना मुनव्वरा में एक हाशमी औरत रहती थी। उसे बाज लोग इजा दिया करते थे। एक दिन वह हुजुर के रौजए अनवर पर हाजीर हुई।

अर्ज करने लगी :-
या रसुलल्लाह! यह लोग मुझे इजा देते हैं।

रौजए अनवर से अवाज आई :-
" क्या मेरा उस्व-ए-हस्ना तुम्हारे सामने नही। दुश्मनो ने मुझे इजाए दी और मैनें सब्र किया। मेरी तरह तुम भी सब्र करो।"

वह औरत फरमाती है की मुझे बड़ी तस्किन हुई और चंद दिन के बाद मुझे इजा देने वाले

उम्मे फातिमा

🌀पोस्ट- 84,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ स्कंदरिया  की एक औरत उम्मे फातिमा मदीना मुनव्वरा में हाजीर हुइ तो उनका पैर जख्मी हो गया। हत्ता की वह चलने से रह गयी। लोग मक्का मोअज्जमा जाने लगे मगर वह वहीं रह गयी।

एक दिन वह किसी तरह रौजए अनवर पर हाजीर हुई। रौजए अनवर की तवाफ करने लगी। तवाफ करते जाती और कहती जाती। या हबीब या रसुलल्लाह! लोग चले गये और मैं रह गयी। हुजुर! या तो मुझे भी वापस भेजीये या फिर अपने पास बुला लिजीये।

यह कह रही थी की तीन अरबी नौजवान मस्जिद में दाखील हुए और कहने लगे की कौन मक्का मोअज्जमा जाना चाहता है।

फातिमा ने जल्दी से कहा : मैं जाना चाहती हुँ। उनमे से एक बोला तो उठो। फातिमा बोली : "मै उठ नही सकती। उसने कहा पैर फैलाओ। तो फातिमा ने अपना सुजा हुआ पैर फैलाया।"

उसका जब सुजा हुआ पैर देखा तो तीनो बोले :- हां! यही वह है, फिर तीनो आगे बढ़े और उम्मे फातिमा को

बिलाल का ख्वाब

🌀पोस्ट- 83   |   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हजरत उमर (रजी अल्लाहु अन्हु) के अहदे खिलाफत में एक मर्तबा कहत पड़ गया तो हजरत बिलाल बिन हारिस मजनी (रजी अल्लाहु अन्हु) रौजए अनवर पर हाजीर हुए और अर्ज किया:-
"या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)! आपकी उम्मत हलाक हो रही है बारिश नही होती।"

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) उन्हे ख्वाब में मिले और फरमाया : "ऐ बिलाल! उमर के पास जाओ । उसे मेरा सलाम कहो और कह दो की बारिश हो जाएगी। उमर से यह भी कहना की कुछ नर्मी इख्तियार करे। {यह हुजुर ने इस लिए फरमाया की हजरत उमर फारुख (रजी अल्लाहु अन्हु) दिन के मामले बड़े सख्त थे}।"

हजरत बिलाल उमर की खिदमत मे हाजीर हुए और हुजुर का सलाम व पैगाम पहुंचा दिया। हजरत उमर यह

उसमान गनी सखावत का धनी

🌀पोस्ट- 82,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ जंगे तबुक के मौके पर हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मुस्लमानो को अल्लाह की राह में खर्च करने की तरगीब दे रहे थे की हजरत उसमान (रजी अल्लाहु अन्हु) उठे और अर्ज किया या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) साज व समान समेत एक सौ ऊंट देता हुँ।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फिर तरगीब दी तो हजरत उसमान ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! साज व समान के साथ दो सौ ऊंट देता हुँ। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फिर तरगीब दी तो हजरत उसमान ने फिर अर्ज किया हुजुर साज व समान के साथ तीन सौ ऊंट मै देता हुँ। फिर उन तीन सौ ऊंटो के अलावा हजरत उसमान ने एक हजार दिनार भी हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के सामने पेश कर दिये।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने हजरत उसमान की यह सखावत देखी तो हजरत उसमान के पेश किये

आसमान का रोना

🌀पोस्ट- 81,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ मदीना मुनव्वरा में एक बार सुखा पड़ गया। बारिश होती ही न थी। लोग उम्मुल मोमीनीन हजरत आइशा (रजी अल्लाहु अन्हा) की खिदमत मे फरियाद लेकर हाजीर हुए।

हजरत उम्मुल मोमीनीन (रजी अल्लाहु अन्हा) ने फरमाया:-
"हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की कब्र अनवर पर से छत मे एक सुराख कर दो ताकी आसमान और कब्र मे कोई हिजाब न रहे।"

चुनांचे:-
लोगों ने ऐसा ही किया तो इस कद्र बारिश हुइ की खेतीयाँ हरी भरी हो गयी और जानवर मोटे हो गये। मुहद्दिसीन

कब्र अनवर से अजान की अवाज

🌀पोस्ट- 80,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ जिस दिन लशकरे यजीद ने मदीना मुनव्वरा पर चढ़ाई की उन दिनो तीन दिन मस्जिदे नब्वी मे अजान न हो सकी। हजरत सईद बिन मुसय्यब (रजी अल्लाहु अन्हु) ने यह तीन दिन मस्जिदे नब्वी मे रहकर गुजारे।

आप फरमाते हैं कि नमाज का वक्त हो जाने का मुझे कुछ पता न चलता था। मगर इस तरह की जब नमाज का

हया-ए-उसमान

🌀पोस्ट- 78,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ एक दफा हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)
अपने दौलतकदा मे लेटे हुए थे। आपकी राने मुबारक या पिन्डली मुबारक से कपड़ा हटा हुआ था। इतने मे हजरत सिद्दिके अकबर तशरिफ ले आये। अंदर आने की इजाजत मांगी।

हुजुर ने इजाजत दे दी। आप अंदर आये और हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) उसी तरह बदस्तुर लेटे रहे। राने मुबारक या पिन्डली से कपड़ा बदस्तुर हटा रहा। आप गुफ्तागु फरमाते रहे।

फिर हजरत उमर (रजी अल्लाहु अन्हु) भी आ गये और अंदर आने की इजाजत मांगी। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उन्हे भी इजाजत दे दी, वह अंदर आ गये। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) फिर भी बदस्तुर लेटे रहे।

फिर हजरत उसमान (रजी अल्लाहु अन्हु) भी आ गये। आपने अंदर आने की इजाजत मांगी तो

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) का गुस्ल मुबारक

🌀पोस्ट- 77,     ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के गुस्ल मुबारक के वक्त सहाबा_ए_किराम अलैहिमुर्रिजवान सोचने लगे और आपस मे कहने लगे - जिस तरह दुसरे लोगों के कपड़े उतारकर उनको गुस्ल दिया जाता है उसी तरह हुजुर के कपड़े मुबारक उतारकर हुजुर को गुस्ल दिया जाए या हुजुर को कपड़ो समेत गुस्ल दिया जाए।

इस बात पर गुफ्तगु कर रहे थे कि अचानक सब पर नींद तारी हो गयी और सबके सर उनके सीनो पर लुढ़क आये, फिर सब को एक अवाज आई, कहने वाला कह रहा था
'तुम जानते नही यह कौन है ?? खबरदारः यह रसुलुल्लाह हैं। इनको कपड़े न उतारना। इन्हे कपड़ो समेत ही

शाही इस्तिकबाल

🌀पोस्ट- 76,   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के विसाल शरिफ के वक्त जिब्रइल अमीन हाजीर हुए और अर्ज करने लगे:-

"या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)! आज आसमानो पर हुजुर के इस्तिकबाल की तैयारीयाँ चल रही है । खुदा तआला ने जहन्नम के दरोगा मालिक को हुक्म दिया है की मालिक मेरे महबुब की रुह मुत्तहरा आसमानो पर तशरिफ ला रही है। इस एजाज मे दोजख की आग बुझा दो और हुराने जन्नत से फरमाया है की तुम अपनी आरास्तगी करो और सब फरिश्तो को हुक्म दिया है की ताजीम रुहे मुस्तफा के लिए सब सफ-ब-सफ खड़े हो जाओ और मुझे हुक्म फरमाया है की मैं आपकी खिदमत मे हाजीर होकर आपको बशारत दुँ की तमाम अंबिया और उनकी उम्मते जन्नत मे दाखील न हो सकेगी जब तक आपकी उम्मत जन्नत मे दाखील न हो जाए। कल क्यामत को अल्लाह तआला आपकी उम्मत पर आपके तुफैल इस बख्शिश व मगफिरत की बारिश

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) और मलकुल मौत

🌀पोस्ट- 75,  ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हुजुर सरवरे आलम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के विसाल शरिफ का जब वक्त आया तो मलकुल मौत जिब्राइल के साथ हाजीर हुए। जिब्रइल अमीन ने अर्ज किया:-

या रसुलल्लाह! यह मलकुल मौत आया है और आप से इजाजत तलब करता है। हुजुर! इसने आज तक कभी न किसी से इजाजत ली है और न आपके बाद किसी से इजाजत लेगा। हुजुर इजाजत दे तो अपना काम करे। हुजुर ने फरमाया मलकुल मौत को आगे आने दो।

चुनांचे:-
मलकुल मौत आगे बढ़े और अर्ज करने लगे
या रसुलल्लाह! अल्लाह तआला ने मुझे आपकी तरफ भेजा है। मुझे यह हुक्म दिया है कि मैं आपका हर हुक्म मानु और जो आप फरमाये वही करुं। लिहाजा आप अगर फरमाये तो मैं रुहे मुबारक कब्ज करुं वरना वापस

खुश अकीदा याफुर

🌀पोस्ट- 74 |   ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ फत्हे खैबर के बाद  हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) वापस आ रहे थे की रास्ते में आपकी खिदमत में एक गधा हाजीर हुआ और अर्ज करने लगा :-
हुजुर! मेरी भी अर्ज सुनते जाइये।

हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) उस मिस्किन जानवर की अर्ज सुनने को ठहर गये और फरमाया:-
"बताओ क्या कहना चाहते हो??"

वह बोला हुजुर मेरा नाम यजीद बिन शहाब है और मेरे दादा के नस्ल से खुदा ने साठ खर पैदा किये हैं, उन सब पर अल्लाह के नबी सवार होते रहे हैं। हुजुर! मेरी दिल की यह तमन्ना है की मुझ मिस्किन पर हुजुर सवारी फरमायें। या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! मैं इस बात का मुस्तहिक हुँ, वह इस तरह की मेरे दादा की औलाद मे सिवाए मेरे कोइ बाकी नही रहा, अल्लाह के रसुलों में से सिवा आपके कोई बाकी नही

भेड़ीये की गवाही

🌀पोस्ट- 73,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ मदीना मुनव्वरा  के किसी मकाम पर एक चरवाहा अपनी बकरियाँ चरा रहा था। अचानक एक भेड़ीया आया और बकरीयों के रेवाड़ मे घुसकर एक बकरी का शिकार ले भागा। चारवाहे ने देखा तो भेड़ीये का पिछा किया और उससे बकरी छुड़ा ली। भेड़ीये ने जब देखा की मेरा शिकार मुझ से छिन गया है तो एक टिले पर चढ़कर ब-जबाने फसीह कहने लगा:-

"मियां चारवाहे! अल्लाह ने मुझे रिज्क दिया था मगर अफसोस! की तुमने मुझसे छीन लिया।"

चारवाहे ने जब एक भेड़ीये को कलाम करते हुये देखा तो हैरान होकर बोला:-
"तअज्जुब है की एक भेड़ीया कलाम करता है।"

भेड़ीये ने फिर कलाम किया और कहा:-
"इससे भी ज्यदा ताज्जुब वाली बात तो यह है कि मदीना शरिफ मे एक ऐसा वुजुद मौजुद है जो तुम्हे जो कुछ हो चूका है और कुछ आइंदा होने वाला है उन सब अगली पिछली बातो को खबर देता है मगर तुम उस पर इमान

हजरत उसमान जुन्नरैन (रजी अल्लाहु अन्हु)

🌀पोस्ट- 72,    ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की चार साहबजादियाँ थी: जैनब, रुकैय्या, उम्मेकुलसुम और फातिमा (रजी अल्लाहु अन्हन)। हजरत रुकैय्या की शादी हजरत उसमान (रजी अल्लाहु अन्हु) से हुई। हजरत रुकैय्या का इंतेकाल हो गया।

हजरत उसमान (रजी अल्लाहु अन्हु) को इस बात का बहुत रंज पहुंचा तो हुजूर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)
ने अपनी दुसरी साहबजादी हजरत उम्मेकुलसुम (रजी अल्लाहु अन्हा) का भी निकाह हजरत उसमान से कर दिया। फरमाया - ऐ उसमान! अगर मेरी सौ लड़कीयां भी हो और उनका एक के बाद एक इंतेकाल होता जाये तो

रात का चोर

🌀पोस्ट- 70,  ✅ सच्ची हिकायत ✅
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〽️ एक मर्तबा  हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने हजरत अबु हुरैरा (रजी अल्लाहु अन्हु) को सदकाए फित्र की हिफाजत के लिए मुकर्रर फरमाया । हजरत अबु हुरैरा (रजी अल्लाहु अन्हु) रात भर उस माल की हिफाजत फरमाते रहे।

एक रात एक चोर आया और माल चुराने लगा। हजरत अबु हुरैरा ने उसे देख लिया। उसे पकड़ लिया। फरमाया: मैं तुझे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की खिदमत में पेश करुंगा। उस चोर ने मन्नत समाजत करना शुरु कर दी, कहा: खुदारा! मुझे छोड़ दो मै सहाबे अयाल हुँ और मोहताज हुँ। अबु हुरैरा को रहम आ गया और उसे छोड़ दिया।

सुबह अबु हुरैरा जब बारगाहे रिसालत मे हाजीर हुए तो हुजुर ने मुस्कुराकर फरमाया-- "अबु हुरैरा! वह रात वाले तुम्हारे कैदी (चोर) ने क्या अर्ज किया??

अबु हुरैरा ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! उसने अपनी अयालदारी और मोहताजी ब्यान की तो मुझे रहम आ गया