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▫पोस्ट-08 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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वाकेआत की तहकीक खुद वाकेआत के ज़माने में जैसी हो सकती है, मुश्किल है कि बाद को वैसी तहकीक हो खास कर जब कि वाकया इतना अहम हो मगर हैरत है कि अह्-ले बैते अत्हार के इस इमामे जलील का कत्ल उसको कातिल की खबर गैर को तो क्या होती। खुद हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु को पता नहीं है। यही तारीखें बताती हैं कि वह अपने बरादरे मुअज़म से जहर देने वाले का नाम दरयाफ्त फरमाते हैं इस से साफ जाहिर है कि हजरत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु को ज़हर देने वाले का इल्म न था।

अब रही यह बात कि हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु किसी का नाम लेते। उन्होंने ऐसा नहीं किया तो अब जअदा को कातिल होने के लिए मुऐयन करने वाला कौन है। हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु को या इमामैन के साहबजादों में से किसी साहब को अपनी आखिरे हयात तक जअदा की जहर खुरानी का कोई सुबूत न पहुँचा न उन में से किसी ने उस पर शरई मुवाख़ज़ा किया।

एक और पहलू इस वाक्या का खास तौर पर काबिले लिहाज़ है वह यह कि हज़रत इमाम की बीवी को गैर के साथ साज़बाज़ करने की बुरी तोहमत के साथ मुत्तहम किया जाता है। यह एक बदतरीन तबर्रा है। अजीब नहीं कि इस हिकायत की बुनियाद खार्जियों की इफ्तराअत हों जबकि सही और मोतबर ज़राए से यह मालूम है कि हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु कसीरुत्तज़व्वुज (ज्यादा शादी करने वाले) थे और आप ने सौ के करीब निकाह किए और तलाकें दीं।

अक्सर एक दो रात ही के बाद तलाक दे देते थे और हज़रत

▫पोस्ट-07 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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इस इरशादे मुबारक से मालूम होता है कि उस वक्त आपकी नज़र के सामने करबला का हौलनाक मंजर और हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु अन्हु की तन्हाई का नक्शा पेश था और कूफियों के मज़ालिम की तस्वीरें आपको गमगीन कर रही थीं। इसके साथ आपने यह भी फरमाया कि मैंने उम्मुल-मोमिनीन हज़रत आइशा सिद्दीका रदिअल्लाहु अन्हा से दरख्वास्त की थी कि मुझे रौज-ए-ताहिरा में दफन की जगह इनायत हो जाए उन्होंने उसको मन्जूर फरमाया। मेरी वफ़ात के बाद उनकी खिदमत में अर्ज किया जाए लेकिन मैं गुमान करता हूँ कि कौम माने (रोकेगी) होगी। अगर वह ऐसा करें तो तुम उन से तक़्रार न करना।

हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु की वफ़ात के बाद हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने वसीयत के मुताबिक हज़रत उम्मुल-मोमिनीन आइशा रदिअल्लाहु अन्हा से दरख़्वास्त की, आपने उसको कुबूल फरमाया और इरशाद फरमाया कि बड़ी इज्ज़त व करामत के साथ मन्जूर है *लेकिन मरवान रोकने लगा और नौबत यहाँ तक पहुँची कि हज़रत इमाम हुसैन और उनके हमराही हथियार बन्द हो गये।*

हज़रत अबू हुरैरह रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने उन्हें भाई की वसीयत याद दिला कर वापस किया और यह फ़रज़न्दे रसूल जिगर गोश-ए-बतूल बकीअ शरीफ में अपनी वालिदा-ए-मोहतरमा हज़रत खातूने जन्नत के पहलू में मदफून हुए। रदिअल्लाहु अन्हुम व रदू अन्हु।

मुअर्रेंखीन ने जहर खुरानी की निस्बत जअदा बिन्ते अशअस इब्ने कैस की तरफ़ की है और उसको हज़रत इमाम की बीवी बताया है और यह भी कहा है कि यह ज़हर खुरानी बइगवाए यज़ीद हुई है और यज़ीद ने उस से निकाह का वादा किया था। इस तमअ (लालच) में आकर उस ने हज़रत इमाम को जहर दिया लेकिन इस रिवायत की

▫पोस्ट-06 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु की शहादत:-

इब्ने सअद ने इमरान इब्ने अब्दुल्लाह से रिवायत की किसी ने हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु को ख़्वाब में देखा कि आपके दोनों चश्म (आँखों) के दर्मियान कुल हुवल्लाहु अहद लिखी हुई है। आपके अहले बैत में उस से बहुत खुशी हुई। लेकिन जब यह ख्वाब हज़रत सईद बिन मुसैय्यिब रदिअल्लाहु अन्हु के सामने बयान किया गया तो उन्होंने फरमाया कि वाकई अगर यह ख्वाब देखा है तो हज़रत इमाम की उम्र के चन्द ही रोज़ रह गये हैं।

यह ताबीर सही साबित हुई और बहुत करीब ज़माने में आपको ज़हर दिया गया। ज़हर के असर से इस्हाल कबदी लाहिक हुआ और आंतों के टुकड़े कट-कट कर इस्हाल में खारिज हुए। इस सिलसिला में आपको चालीस रोज़ सख्त तक्लीफ़ रही। क़रीबे वफ़ात जब आपकी खिदमत में आपके बरादरे अज़ीज़ सैय्यदना हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने हाज़िर हो कर दरयाफ्त फरमाया कि आपको किस ने जहर दिया है तो फरमाया कि तुम उसे क़त्ल करोगे। हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने जवाब दिया कि बेशक हज़रत इमाम आली मकाम ने फरमाया कि मेरा गुमान जिस की तरफ़ है अगर दरहकीक़त वही कातिल है तो अल्लाह तआला मुन्तकिमे हकीकी है और उसकी गिरफ्त बहुत सख्त है और अगर वह नहीं है तो मैं नहीं चाहता कि मेरे सबब से कोई बेगुनाह मुब्तलाए मुसीबत हो। मुझे इस से पहले भी कई मरतबा ज़हर दिया गया है लेकिन इस मरतबा का ज़हर सबसे ज्यादा तेज़ है।

सुब्हानल्लाह हज़रत इमाम की करामत और मंज़िलत कैसी बुलन्द व बाला है कि अपने आप सख्त तक्लीफ में मुब्तला हैं, आंतें कट-कट कर निकल रही हैं। नज़्अ की हालत है मगर इंसाफ़ का बादशाह उस वक्त भी अपनी अदालत व इंसाफ का न मिटने वाला नक्श सफः तारीख पर नक्श फरमाता है। उसकी एहतियात इजाजत नहीं देती कि जिस की तरफ़ गुमान है उसका नाम भी लिया जाए। उस वक्त आपकी उमर शरीफ़ पैंतालीस साल छः माह चन्द रोज की थी कि आपने पाँचवें रबीउल-अव्वल 49 हिजरी को इस दारे नापाइदार से मदीना-ए-तैय्यबा में रहलत फरमाई।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन !

वफ़ात के करीब हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने देखा कि उनके बरादरे मोहतरम हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु को घबराहट और बेक़रारी ज्यादा है पेशानी-ए-मुबारक पर हुज्न व मलाल के आसार नमूदार हैं। यह देख कर हज़रत इमाम हुसैन रदिअल्लाहु अन्हु ने तस्कीने खातिर मुबारक के लिए अर्ज

▫पोस्ट-05 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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हज़रत अमीर मुआविया की तरफ से हज़रत इमाम आली मकाम का वज़ीफ़ा एक लाख सालाना मुक़र्रर था। एक साल वज़ीफ़ा पहुँचने में ताखीर हुई और इस वजह से हज़रत इमाम को सख्त तंगी दर पेश हुई। आपने चाहा कि अमीर मुआविया को उसकी शिकायत लिखें, लिखने का इरादा किया, दवात मंगाई मगर फिर कुछ सोच कर तवक्कुफ़ किया। ख्वाब में हुज़ूर पुर नूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दीदारे पुर अनवार से मुशर्रफ़ हुए। हुज़ूर ﷺ ने इस्तिफ्सारे हाल फरमाया और इरशाद फरमाया कि ऐ मेरे फ़रज़न्दे अरजुमन्द क्या हाल है। अर्ज़ किया अल्हम्दुलिल्लाह बखैर हूँ और वज़ीफे की ताख़ीर की शिकायत की ।

हुजूर ने फरमाया तुम ने दवात मंगाई थी, ताकि तुम अपनी मिस्ल एक मख्लूक़ के पास अपनी तकलीफ़ की शिकायत लिखो। अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मज्बूर था क्या करता । फरमाया यह दुआ पढ़ो-

तरजमा: या रब मेरे दिल में अपनी उम्मीद डाल और अपने मासिवा से मेरी उम्मीद कतअ कर यहाँ तक कि मैं तेरे सिवा किसी से उम्मीद न रखूँ। या रब जिस से मेरी कुव्वत आजिज़ और अमल कासिर हो और जहाँ तक मेरी रगबत और मेरा सवाल न पहुँचे और मेरी जुबान पर जारी न हो, जो तू ने अव्वलीन व आखिरीन में से किसी को अता फरमाया हो यकीन से या रब्बल-आलमीन मुझ को उसके साथ मख्सूस फरमा।

हज़रत इमाम फरमाते हैं कि इस दुआ पर एक हप्ता न गुज़रा कि अमीर मुआविया ने मेरे पास एक लाख पचास हजार भेज दिए और मैंने अल्लाह तआला की हम्द व सना की और उसका शुक्र बजा लाया। फिर ख़्वाब में दौलते

▫पोस्ट-04 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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हज़रत इमाम रदिअल्लाहु तआला अन्हु की खिलाफत :-

हज़रत मौला अली मुर्तजा करंमल्लाहु वज्हुहुल-करीम की शहादत के बाद हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु मस्नदे ख़िलाफ़त पर जलवा अफ्-रोज़ हुए।

अह्-ले कूफा ने आपके दस्ते हक़ पर बैअत कीऔर आपने वहाँ चन्द माह क्याम फरमाया इसके बाद आपने अम्रे ख़िलाफ़त को हज़रत अमीर मुआविया को तफ्वीज़ करना मस्तूर जेले शराइत पर मन्जूर फरमाया :

1).  बाद अमीर मुआविया रदिअल्लाहु अन्हु के ख़िलाफ़त हज़रत इमाम हसन को पहुँचेगी।

2). अह्-ले मदीना और अह्-ले हिजाज़ और अह्-ले इराक में किसी शख्स से भी ज़मान-ए-हज़रत अमीरुल-मोमिनीन मौला अली मुर्तजा कर्रमल्लाहु वज्हुहुल-करीम के मुतअल्लिक कोई मुवाखज़ा व मुतालबा न किया जाए।

3). अमीर मुआविया, इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु के दुयून (कर्ज़ों) को अदा करें।

हज़रत अमीर मुआविया ने यह तमाम शराइत कुबूल कीं और आपस में सुलह हो गई और हुजूरे अनवर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह मोजिज़ा ज़ाहिर हुआ, जो हुज़ूरﷺ ने फरमाया था कि
अल्लाह तआला मेरे इस फ़रज़न्दे अरजुमन्द की बदौलत मुसलमानों की दो जमाअतों में सुलह फरमाएगा।

हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने तख़्ते सल्तनत हज़रत मुआविया रदिअल्लाहु अन्हु के लिए खाली कर दिया।

यह वाकया रबीउल-अव्वल 41 हिजरी का है। हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु के अस्हाब को

▫पोस्ट-03 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु के मनाकिब बहुत ज़्यादा हैं। आप इल्म व वकार हश्मत व जाह जूद व करम, जुह्द व ताअत में बहुत बुलन्द पाया हैं एक-एक आदमी को एक-एक लाख का अतीया मरहमत फरमा देते थे।

हाकिम ने अब्दुल्लाह बिन उबैद उमैर से रिवायत किया कि हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु ने पच्चीस हज पा प्यादा (पैदल) किए हैं और शाही सवारियाँ आपके हमराह होती थीं मगर इमाम आली मकाम की तवाजु और इख्लास व अदब का इक़्तिजा कि आप हज के लिए पैदल ही सफर फरमाते। आपका कलाम बहुत शीरीं था। अह्-ले मज्लिस नहीं चाहते थे कि आप गुफ्तगू खत्म फरमाएँ।

इब्ने सअद ने अली बिन जैद जदआन से रिवायत की कि हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने दोबार अपना सारा माल राहे खुदा में दे डाला और तीन मरतबा आधा माल दिया और ऐसी सहीह तन्सीफ़ की कि नअलैन शरीफ़ और जुराबों में से एक-एक देते थे और एक-एक रख लेते थे।

आपके हिल्म का यह हाल था कि इब्ने असाकिर ने रिवायत किया कि आपकी वफ़ात के बाद मरवान बहुत रोया। इमाम हुसैन रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि आज तू रो रहा है और उनकी हयात में उनके साथ किस-किस तरह की बदसुलूकियाँ किया करता था, तो वह पहाड़ की तरफ इशारा करके कहने लगा मैं उस से ज्यादा

▫पोस्ट-02 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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बुखारी व मुस्लिम ने हज़रत बरा इब्ने आज़िब रदिअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत की फरमाते हैं- मैंने नूरे मुजस्सम जाने मुसव्विर सैय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़्यारत की। शहज़ादा-ए-बुलन्द इक्बाल हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु आपके दोशे अक्दस पर थे और हुज़ूरﷺ फरमा रहे थे- या रब मैं इसको महबूब रखता हूँ तो तू भी महबूब रख ।

इमाम बुखारी ने हज़रत अबू बकर रदिअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत की, फरमाते हैं कि हुजूर सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिंबर पर जलवा अफ़रोज़ थे। हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु आपके पहलू में थे। हुज़ूर ﷺ एक मरतबा लोगों की तरफ नजर फरमाते और एक मरतबा उस फ़रज़न्दे जमील की तरफ्। मैंने सुना हुज़ूरﷺ ने इरशाद फरमाया कि यह मेरा फरज़न्दे रशीद है और अल्लाह तआला इसकी बदौलत मुसलमानों की दो जमाअतों में सुलह करेगा।

बुख़ारी में हज़रत इब्ने उमर रदिअल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है कि हुज़ूर पुर नूर सैय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया हसन हुसैन दुनिया में मेरे दो फूल हैं।

तिर्मिज़ी की हदीस में है, हुज़ूर अलैहि व अला आलेही व अस्हाबेहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया- हसन और हुसैन जन्नती जवानों के सरदार हैं।

इब्ने सअद ने अब्दुल्लाह बिन जुबैर से रिवायत की कि हुज़ूर ﷺ के अहले बैत में हुज़ूर के साथ सबसे ज्यादा मुशाबेह और हुज़ूर को सबसे प्यारे हज़रत इमाम हसन थे। मैंने देखा हुज़ूरﷺ तो सज्दे में होते और यह वाला

▫पोस्ट-01 | 🌹हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु🌹

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हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु:-

हज़रत इमाम अबू मुहम्मद हसन बिन अली-ए-मुर्तजा रादिअल्लाहु अन्हु, आप अइम्मा इस्ना अशरह में इमामे दोम हैं। आपकी कुन्नियत अबू मुहम्मद लकब तकी व सैयद उर्फ सिब्ते रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सिब्ते अक्बर है। आपको रैहानतुर्रसूल और आखिरुल-खुल्फ़ा बिन्नस भी कहते हैं। आपकी विलादते मुबारका 15 रमज़ानुल-मुबारक 3 हिजरी की रात में मदीना-ए-तैयबा के मकाम पर हुई । हुजूर सैय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आपका नाम हसन रखा और सातवें रोज़ आपका अकीका किया और बाल जुदा किए गये और हुक्म दिया गया कि बालों के वज़न की चाँदी सदका की जाए आप खामिसे अह्-ले कुसा हैं।

बुखारी की रिवायत में है किब्ला-ए-हुस्न व जमाल सैय्यदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलेही व बारिक व सल्लम से किसी को वह मुशाबेहत सूरते हाल न थी जो सैय्यदना हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु अन्हु को हासिल थी। आप से पहले हसन किसी का नाम न रखा गया था यह जन्नती नाम पहले आप ही को अता हुआ है। हज़रत अस्मा बिन्ते उमैस ने बारगाहे रिसालत में हज़रत इमाम हसन रदिअल्लाहु तआला अन्हु की विलादत का मुज्दा पहुँचाया।

हुजूर ﷺ तशरीफ़ फरमा हुए फरमाया कि अस्मा मेरे फरज़न्द को लाओ। अस्मा ने एक कपड़े में हुजूरﷺ की ख़िदमत में हाजिर किया। सैय्यद आलम अलैहिस्सलातु वत्तस्लीमात ने दाहिने कान में अज़ान और दाएं में तक्वीर फरमाई और हज़रत अली मुर्तजा रदिअल्लाहु अन्हु से दरयाफ्त फरमाया- तुम ने इस फ़रज़न्दे अरजुमन्द का क्या नाम रखा है? अर्ज किया कि या रसूलुल्लाह मेरी क्या मजाल कि बेइज्न व इजाज़त नाम रखने पर पहल